सौर ऊर्जा से फसलों की सिंचाई
घंटोंबिजली कटौती और भारी भरकम बिजली के बिल से हर साल होने वाले नुकसान का तोड़ अब किसानों को ऊर्जा के सबसे बड़े स्रोत के रूप में मिला है। सरकार द्वारा मिल रहे अनुदान से किसान को ना सिर्फ भारी बिल से निजात मिल रही है बल्कि बिजली कटौती के कारण होने वाले नुकसान की शंका से भी राहत मिल गई है। इससे ना सिर्फ ऊर्जा की बचत हो रही है बल्कि समय पर सिंचाई होने से किसानों को मुनाफा भी हो रहा है।
गांवमें बने प्रेरणास्रोत : उदयपुररोड नरबदखेड़ा निवासी भंवर सिंह की स्थिति दो साल पहले बड़ी ही दयनीय थी। कुएं में भरपूर पानी होने के बावजूद इंजन से सिचांई करने के दौरान डीजल और इंजन के बार बार खराब होने के कारण कई बार आधी फसल खराब हो जाती। इस दौरान भंवर सिंह को सौर ऊर्जा सयंत्र लगवाने पर सरकार द्वारा अनुदान मिलने की जानकारी हुई। दो साल पहले उसने मात्र 65 हजार रुपए लगाकर खेत पर 4 लाख 82 हजार रुपए का सौर ऊर्जा सयंत्र लगवा लिया। उसने बताया कि सयंत्र की बाकी 86 प्रतिशत कीमत सरकार द्वारा अनुदानित कर दी गई।
धरतीउगलने लगी सोना : भंवरसिंह ने बताया कि खेत में 13 सौलर प्लेट एक पैनल लगाए गए। 20 साल की गांरटी वाले पूरे सेट में दो साल के भीतर एक बार भी कोई खराबी नहीं आई। उसने बताया कि पहले साल में एक फसल भी पाना मुश्किल होता था तो वहीं अब साल में रबी और खरीफ की फसल के समेत चारा अाैर हरी सब्जियां भी होती है। मुनाफे से वह आज गंाव में दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। भंवर सिंह ने बताया कि लोगों में भ्रांति है कि आसमान में बादल होने पर सयंत्र काम नहीं करेगा। ऐसा नहीं है, आसमान में बादल होने के बाद भी सयंत्र आसानी से सिंचाई करता है, हां पंप की स्पीड थोड़ी धीमे जरूर हो जाती है।
^पंचायत समिति में तीन काश्तकारों ने बस्सी, नरबदखेड़ा और ब्यावर खास में सौलर पेनल लगवाएं हैं। इससे डीजल में प्रतिमाह 7 हजार रुपए की बचत होती है तो वहीं तीन महीनों में सिचांई करने के दौरान करीब 22 हजार रुपए की बिजली की भी बचत होती है। सरकार इस सिस्टम पर 70 से 80 प्रतिशत तक अनुदान भी देती है। विष्णूदत्त उपाध्याय, कृषिपर्यवेक्षक, नरबदखेड़ा
ब्यावर. खेतमें लगा सौर ऊर्जा सयंत्र और सिंचित फसल।