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जम्मू-कश्मीर पीडि़तों के लिए भाजपा ने मांगी मदद
सीने तक भरे पानी में 15 किलोमीटर तक तबाही भरा सफर
जम्मू-कश्मीरमें बाढ़ के खौफनाक मंजर का सामना करते हुए सोमवार को आखिरकार ब्यावर के दो मासूम अपनों तक पहुंच गए। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे ब्यावर के मासूम विकास वैष्णव और योगेश साहू को रात में सोने के बाद क्या पता था कि जब आंख खुलेगी तब सामने प्रकृति का खौफनाक रूप दिखाई देगा। 8 सितंबर की आधीरात जब डल झील के पिछवाड़े स्थित इंडस होस्टल के दूसरे माले पर अपने साथियों के साथ सोते हुए इन मासूमों को पता चला कि पहला माला पूरी तरह पानी में डूब चुका है। एक बारगी तो सभी के होश फाख्ता हो गए, लेकिन दूसरे ही पल अपने साथियों के साथ दोनों होस्टल की छत पर पहुंचकर भरी बरसात में भोर होने का इंतजार करने लगे।
सुबह सेना की मदद से होस्टल के बाहर निकलने में कामयाब होने के बाद इन मासूमों को लगातार 15 किलोमीटर तक सीने के सामने हिलौरे खा रहे पानी को चीरकर जोखिमभरा सफर तय करना पड़ा। अपने तीन अन्य साथियों के साथ बमुश्किल जान बचाकर जम्मू-कश्मीर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से ब्यावर लौटे इन मासूमों ने जब वहां के तबाही भरे मंजर को बयां किया तो परिजन की रूलाई फूट पड़ी। मासूमों ने बताया कि भारतीय सेना की वजह से ही जम्मू-कश्मीर में लाखों लोगों की जान बच पा रही है। सेना के जवान लगातार 24 घंटे लोगों को पानी से बाहर निकालने के साथ उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और खाने-पीने का सामान उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। हेलीकॉप्टर की मदद से सभी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। उन्हें भी सेना के मालवाहक विमान से 250 लोगों के साथ अमृतसर हवाई अड्डे पर पहुंचाया गया। जहां खाने के पैकेट उपलब्ध कराने के बाद रेलवे स्टेशन पहुंचाकर ट्रेन में सवार कराया गया। जिससे वे लोग जिंदा घर लौट पाए। दोनों मासूमों के अलावा समीपवर्ती आसींद के अरविंद सिंगाडिया, बिलाड़़ा के अभिषेक सिरवी और कानाराम सिरवी भी ब्यावर स्टेशन पर उतरने के बाद अपने घर रवाना हुए। राजस्थान सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर में फंसे राजस्थानियों के लिए कोई मदद उपलब्ध नहीं होने को लेकर परिजन के साथ मासूमों में भी रोष व्याप्त है।
ब्यावर. अपने परिजन के साथ कश्मीर से लौटे इंजीनियरिंग छात्र।
ब्यावर. मुख्य बाजार में धन संग्रह करते भाजपाई।