- Hindi News
- बेकद्री से बर्बाद हो रहा पशुधन, सड़कों पर डोल रहा गोवंश
बेकद्री से बर्बाद हो रहा पशुधन, सड़कों पर डोल रहा गोवंश
शास्त्रोंमें भले ही गोवंश को देवताओं के बराबर दर्जा दिया गया हो। धर्म कथाओं के आयोजन के दौरान कथावाचक गोवंश के महत्व को बताते हुए जागरूकता लाने के लिए प्रयासरत हो। लेकिन बेकद्री के चलते दिनों दिन लावारिस गोवंश की तादाद में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
पशुपालकों में नर गोवंश की अपेक्षा मादा गोवंश के प्रति अत्यधिक लगाव होने से बछड़े बैल बेपरवाही का शिकार हो रहे हैं। उपयोग के अभाव में नर गोवंश को पालने की बजाय विचरण के लिए खुलेआम छोड़ने का सिलसिला जारी है। आवारा पशुओं को खुलेआम छोड़ने के मामले में रोकटोक नहीं होने से शहर की सड़कों पर गोवंश का झुंड आवागमन में जोखिम बढ़ा रहा है।
घर-घर सहयोग से मिल सकता है संरक्षण : भास्कर सजेशन
>पुरानेजमाने से हर घर में पहली रोटी गाय के लिए पकाने की परंपरा चली रही है। जो लोग गाय के महत्व को जानते समझते हैं वे आज भी पहली रोटी गाय के नाम की निकालते है।
>घायल लाचार गोवंश को चारा-पानी की व्यवस्था कराकर सेवा करें।
>गोशाला के अलावा गली-मोहल्लों में विचरण करने वाली गायों को भी चारा खिलाएं।
इन मार्गों पर जमा रहता है डेरा
मानसून के दिनों की मैदानी इलाकों से निकलकर सड़क पर आने का सिलसिला शुरू होता है। प्रमुख रूप से सतपुलिया मोड़ वाले बालाजी, रोडवेज बस स्टैंड, सिटी थाने के सामने, भगत चौराहा, स्टेशन रोड, कॉलेज रोड, सेंदड़ा रोड के मुख्य मार्ग में ज्यादा तादाद मिलती है। इसके अलावा पाली बाजार, मालियान चौपड़, पीपलिया बाजार, मेवाड़ी गेट बाजार में सड़क पर गायें आसानी से देखने को मिल जाती है।
भूख के बराबर चारा-पानी नहीं मिल पाने से गोवंश सड़क पर भोजन की तलाश में देर रात तक भटक रहे हैं। मुख्य मार्गों पर जमावड़ा बनाकर विचरण करते गोवंश संरक्षण के अभाव में दुर्घटनाओं का सबब बन रहा है। वाहनों की टक्कर से गोवंश खुद के साथ-साथ दूसरों को भी चोटिल कर रहे हैं। सुरक्षा-संरक्षण नहीं मिल पाने से गोवंश की बेकद्री बढ़़ती जा रही है। कुछ महीनों पहले बरसात के दिनों से गोवंश मैदानी इलाकों से सड़क पर पहुंच रहा है। सड़क के बीच डिवाइडर या उनके किनारों में गोवंश विचरण करते रहते है। ऐसे में छोटे-बड़े वाहनों की टक्कर का शिकार बनते जा रहे है। स्वयं सेवी संस्थाओं या प्रशासनिक दृष्टि से संरक्षण मिले तो गोवंश को बेकद्री का शिकार बनने से बचाया जा सकता है।
मैदानी इला