शहर को तो करें खुले मेंं शौच से मुक्त
ब्यावर| सरकारस्वच्छ भारत मिशन के तहत शतप्रतिशत गांवों को खुले में शौच से मुक्त घाेषित करने में जुटी हुई है मगर शहर में खारिया कुआं क्षेत्र में मिल कॉलोनी के 72 परिवार आजादी के 68 साल बाद भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। क्षेत्र में सड़क और गंदे पानी की निकासी की समस्या भी विकट हो चुकी है।
खारियां कुआ क्षेत्र निवासी विजय कुमार ने बताया कि क्षेत्र के विकास को लेकर कोई गंभीर नहीं लगता। सालों पहले यहां सड़क का निर्माण हुआ था। खारियां कुआं क्षेत्र में एक हैंडपंप लगा है। जिसके पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण उसका पानी सड़क पर ही फैलता है और गंदे पानी के जमा होने से बीमारियां फैलने का डर रहता है।
एकभी घर में नहीं शौचालय: कृष्णामिल की चाली में 72 परिवार निवास करते हैं। मिल में काम करने वाले मजदूर परिवारों के लिए बनी इस चाली में सालों से श्रमिक अपने परिवार के साथ रहते आए हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण यहां के लोग बमुश्किल अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। ऐसे में शौचालय बनवा पाना इनके बूते की बात नहीं। राजनीतिक अनदेखी के कारण इन परिवारों में से अधिकतर का चयन बीपीएल के लिए भी नहीं हुआ।
सार्वजनिकशौचालय की मांग पेंडिंग : इन72 परिवारों की महिलाओं की समस्या को देखते हुए पूर्व सभापति शांति डाबला ने परिषद को पत्र लिखकर महीनों पहले सार्वजनिक शौचालय की मांग उठाई। लेकिन सार्वजनिक शौचालय की मांग पूरी नहीं हो पाई।