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डीएफसी परियोजना पकड़ने लगी रफ्तार

5 वर्ष पहले
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रेलवेकी महत्वाकांक्षी योजना वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के काम में अब दाेगुनी तेजी गई है। वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर योजना के तहत रेवाड़ी से पालनपुर तक करीब 360 किलोमीटर तक डबल ट्रेक का काम एक जापानी कंपनी अंजाम दे रही है।

योजना के तहत ब्यावर रेलवे स्टेशन और नरसिंगुपरा नदी के समीप कंपनी द्वारा पुलिया के निर्माण के लिए लोहे के गार्डर और सीमेंट की फाउंडेशन का कार्य किया जा रहा है।

कंपनी ने रेलवे स्टेशन के समीप बने कर्मचारियों के क्वार्टर समेत पायलेट एवं गार्ड रेस्ट रूम को भी धराशायी कर दिया है। डबल ट्रेक के लिए समतलीकरण के काम के साथ ही इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य भी किया जा रहा है।

सबसे बड़ी परियोजना : रेलवेकी अब तक की ये सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है। रेवाडी से पालनपुर तक डबल ट्रेक बनाया जाएगा। जिस पर डबल डेकर कंटेनर चलेंगे। जिससे एक ही बार में दो गुणा से अधिक माल का लदान हो सकेगा। वर्तमान में पैसेंजर और मालगाड़ी के लिए एक ही ट्रेक होने के कारण ट्रेक पर 40 फीसदी पैसेंजर ट्रेन ही चल पाती है। गुड्स ट्रेनों के लिए अलग से ट्रेक बनने पर पैसेंजर ट्रेनों में भी वृद्धि होने की संभावना है।

आगेक्या : डेडिकेटेडफ्रेट कॉरिडोर ट्रेक पर एक दिन में करीब 140 गुड्स ट्रेन चलेगी। इस ट्रेक के बिछने से ना सिर्फ हाइवे पर रोड ट्रैफिक कम होगा बल्कि माल लदान की कीमतों में कमी होने से सामग्री के दामों में भी कमी आएगी। यात्री ट्रेक पर एक भी गुड्स ट्रेक नहीं चलेगी तो ट्रैक खाली रहेगा और यात्री गाड़ी की स्पीड़ बढ़ने के साथ नई गाड़ियां भी चलाई जा सकेंगी। अभी गुड्स ट्रेन डीजल इंजन से चलती है लेकिन पूरा ट्रेक इलेक्ट्रिक सिस्टम होने के कारण ये ट्रेन इलेक्ट्रिक इंजन से चलेगी। पूरा ट्रैक ऑटोमेटिक सिस्टम प्रणाली से संचलित होगा। 360 किलोमीटर के ट्रेक में करीब 139 ब्रिज बनेंगे।

अब स्टेशन पर नहीं आएगी मालगाड़ी

वेस्टर्नडेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का कार्य पूरा होने में अभी करीब 2 साल और लग जाएंगे। परियाेजना को काम पूरा होने के बाद रेलवे की लदान प्रणाली सुदृढ हो जाएगी। वर्तमान में वेस्टर्न रेलवे ट्रेक पर पैसेंजर और मालगाड़ियों के लिए एक ही ट्रेक है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बिछने के बाद पैसेंजर ट्रैक पूरी तरह से गुड्स ट्रेनों से मुक्त हो जाएगा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की खास बात ये है कि इस ट्रैक पर समपार फाटक नहीं होगी। अधिकतर जगह ओवरब्रिज और अंडरब्रिज की मदद से समपार फाटक से मुक्त रखा गया है। इससे गुड्स ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़कर 70 से 75 किलोमीटर प्रतिघंटा हो जाएगी। वर्तमान में गुड्स ट्रेनों की रफ्तार करीब 20 से 25 किलोमीटर प्रतिघंटा है। ट्रेक के पूरा होने पर रेलवे के माल भाड़े की कीमत में कमी आएगी और लदान क्षमता में वृद्धि होगी।

ब्यावर. स्टेशन के मैन गेट के सामने शुरू हुआ डीएफसी निर्माण कार्य। रेलवे कर्मचारियों के क्वार्टर्स को ध्वस्त करने के बाद काम ने पकड़ी गति।

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