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एकेएच में 10 लाख की टीएमटी मशीन हो रही कबाड़

4 वर्ष पहले
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प्रदेशके सबसे ज्यादा आउटडोर और कायाकल्प योजना में लगातार दो बार प्रदेश के तीसरे नंबर का जिला अस्पताल होने के बावजूद राजकीय अमृतकौर अस्पताल एक ओर जहां डॉक्टरों, नर्सिंग स्टॉफ समेत अन्य कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है तो वहीं कई विभागों में लाखों की मशीन बिना मेंटेनेंस और उपयोग के कबाड़ होने के कगार पर है। एकेएच के कॉटेज वार्ड के आईसीयू वार्ड में रखी करीब 10 लाख रुपए की टीएमटी मशीन की भी ये ही स्थिति है। यह मशीन करीब 10 साल पहले तत्कालीन पीएमओ डॉ. प्रदीप शारदा के समय एकेएच में स्थापित की गई थी। फिजिशियन डॉ. प्रदीप शारदा की देखरेख में वरिष्ठ नर्सिंग स्टॉफ अशोक सोलंकी मरीजों का टीएमटी(ट्रेड मिल टेस्ट) करते थे। डॉ. शारदा के निदेशक बनने के बाद भी डॉ. एनके सुराणा की देखरेख में अशोक सोलंकी मरीजों का टेस्ट करते रहे। डॉ. एनके सुराणा के रिटायर होने के बाद से ये मशीन भी करीब रिटायर हो गई। स्टॉफ ड्यूटी रूम में रखी मशीन को आईसीयू वार्ड में रख दिया गया। करीब चार साल से एक मशीन से एक भी टीएमटी नहीं हो सकी है। जिस कारण मरीजों को टीएमटी टेस्ट के लिए या तो अजमेर जाना पड़ रहा है, या निजी अस्पताल में जाना पड़ रहा है।

1हजार रुपए में जांच : राजकीयअमृतकौर अस्पताल में करीब 4 साल पहले तब जब टीएमटी की जाती थी तो उसके लिए 400 रुपए की रसीद कटती थी। लेकिन चार साल से जांच नहीं हो रही है इस कारण मरीजों को बाहर जांच करवानी पड़ रही है। जिसके लिए मरीजों को 1 हजार रुपए तक भुगतने पड़ रहे हैं। वहीं चार सालों से मशीन के काम नहीं अाने के कारण इसके कई पार्ट्स खराब हो चुके हैं, इंक सूख चुकी है और कई प्वाइंट भी नकारा हो चुके हैं।

15दिन के प्रशिक्षण के बाद नर्सिंग स्टाफ कर सकता है : हालांकिट्रेड मिल टेस्ट फिजिशियन की मौजूदगी में ही होना चाहिए। लेकिन कई निजी अस्पतालों में भी ये टेस्ट बिना डॉक्टर की मौजूदगी में दक्ष नर्सिंग कर्मी ही करते हैं। एकेएच में सीनियर नर्सिंग स्टॉफ अशोक सोलंकी भी टीएमटी में निपुण है। इसके साथ ही अगर अस्पताल प्रबंधन चाहे तो किसी नर्सिंग कर्मी को अजमेर मेडिकल कॉलेज में 15 दिन का प्रशिक्षण दिलवा कर टीएमटी के लिए योग्य बना कर ये टेस्ट एकेएच में ही करवा सकता है।

जानिएक्या होता है टीएमटी : ट्रेडमिल पर मरीज को पैदल चलाकर और दौड़ाकर हार्टबीट जांची जाती है। मशीन पर व्यायाम करने करने से शरीर पर जोर पड़ता है। इससे शरीर को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है और धड़कन तेज हो जाती है। इससे ये भी पता चलता है कि दिल को सही तरह से खून मिल रहा है कि नहीं। मशीन पर चलने व्यायाम करने के दौरान अलग अलग नलियां शरीर पर लगाई जाती है, जो कंप्यूटर से जुड़ी होती है। इससे शरीर में होने वाले परिवर्तन, ब्लड प्रेशर, हार्टबीट सभी जानकारियां कंप्यूटर में दर्ज हो जाती है। ये टेस्ट डॉक्टर द्वारा हार्ट अटैक का खतरा होने या धड़कन तेज होने पर करवाया जाता है।

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