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जहां खतरा ज्यादा, वहीं नहीं बचने के इंतजाम

6 वर्ष पहले
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स्वाइन फ्लू को लेकर अस्पताल प्रबंधन भले ही अपने स्तर पर भरसक प्रयास कर रहा हो, लेकिन मरीजों और जांच कराने वालों की संख्या सैंकड़ों की तदाद में पहुंचने से अस्पताल सर्वाधिक भीड़-भाड़ वाला स्थल बना हुआ है। ऐहतियात बरतने के बावजूद भीड़ को काबू कर पाना चुनौती बना हुआ है। डॉक्टर स्टॉफ कमी होने से मरीजों को व्यवस्थित करने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। आलम यह हैं कि अस्पताल में मॉस्क की कमी के चलते डॉक्टर कर्मचारियों को अपने स्तर पर खुद के बचाव के उपाय करने पड़ रहे है।

अमृतकौर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड के बाहर स्वाइन फ्लू जांच दवा लेने के लिए खड़े लोग।

ब्यावर. अस्पताल का आइसोलेशन वार्ड, जहां दो पॉजिटिव दो संदिग्ध मरीजों का इलाज चल रहा है।

भास्कर न्यूज| ब्यावर

अजमेरजिले में तेजी से फैल रहे स्वाइन फ्लू के संक्रमण से ब्यावर क्षेत्र अछूता नहीं रहा। स्वाइन फ्लू से मौत और संक्रमित मरीजों के लगातार सामने आने का सिलसिला बरकरार रहने से ब्यावर क्षेत्र में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। लेकिन इसमें सबसे अधिक खतरा अस्पताल में हैं जहां हर रोज बड़ी तादाद में कई मरीज अपना इलाज कराने पहुंचते है। इलाज के लिए अस्पताल में डॉक्टर के कक्ष में लंबी कतार के बीच खड़े मरीजों में से ही स्वाइन फ्लू के मरीज सामने निकल कर आते हैं। इस पर उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करके उपचार चालू कर दिया गया। लेकिन ऐसे मरीजों के सामने आने के बाद डॉक्टर के कक्ष या स्वाइन फ्लू संक्रमित मरीज की मौजूदगी वाले स्थल को संक्रमण रहित करने की ओर ध्यान नहीं दिया गया। जिससे अस्पताल के डॉक्टर कक्ष, परिसर के हिस्सों जगहों को संक्रमण रहित करने की दरकार बनी हुई है।स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ने के बाद राजकीय अमृतकौर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले आउटडोर मरीजों की संख्या में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। हर रोज 8 सौ मरीजों वाले अस्पताल में रोजाना 3 सौ से 4 सौ मरीज अपने इलाज जांच के लिए पहुंच रहे है।

ब्यावरमें खुले जांच केंद्र

अमृतकौरअस्पताल में इलाज के लिए ब्यावर के अलावा पाली, राजसमंद, भीलवाड़ा आदि अन्य जिलों के मरीज भी आते है। जिला स्तरीय अस्पताल होने के बावजूद यहां स्वाइन फ्लू के स्वाब की जांच सुविधा नहीं है। ऐसे में संक्रमित मरीजों की जांच आने में समय लगता हैं, साथ ही उन्हें अजमेर रेफर करना पड़ता है। रोजाना बड़ी तदाद में आने वाले मरीजों में अधिकतर लोग स्वाइन फ्लू की जांच कराने के मकसद से ही अस्पताल पहुंच रहे हैं, ऐसे में स्वाइन फ्लू की जांच स्थानीय स्तर पर नहीं होने की कमी भी खल रही है।

दवाकी कमी

जिलास्तर से स्वाइन फ्लू की रोकथाम इलाज के लिए अमृतकौर अस्पताल को जरूरत मरीजों की आवक के अनुपात में टेमी फ्लू दवा का आवंटन नहीं हो रहा है। दवा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल प्रबंधन को उच्च स्तर तक मशक्कत करनी पड़ रही है। हालात यह हैं कि दो दिन पहले आवंटित हुई 500 टेमी फ्लू में से सोमवार तक 250 टेमी फ्लू मरीजों में वितरित हो चुकी। इसके अलावा 30 एमजी वाली महज 30 टेमी फ्लू और 4 में से 1 सिरप ही स्टॉक के रूप में मौजूद है।

^हर जगह फ्यूमिगेशन कर पाना संभव नहीं है। साफ-सफाई फिनायल से कमरों अन्य हिस्सों को साफ करा दिया जाता है। जरूरत के हिसाब से मास्क तो उपलब्ध हैं, लेकिन टेमी फ्लू के लिए हमें अपर लेवल से आश्वासन मिला हैं कि बहुत जल्दी कमी दूर कर दी जाएगी। मरीजों की मौजूदगी को लेकर व्यवस्था सुधारने के लिए हम लगातार कोशिश कर रहे हैं।’ डॉ.प्रमोदपोरवाल, पीएमओ।

^स्वाइनफ्लू के खतरे के कारण आउटडोर में रोजाना 3 सौ से ज्यादा मरीज रहे है। जिससे अस्पताल ओवर क्राउड ऐरिया बना हुआ है। मरीज लाइन में खड़े नहीं होते, जिससे अव्यवस्था संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ जाता है। अधिकांश मरीज स्वाइन फ्लू की जांच के लिए अस्पताल में आते हैं, लेकिन सभी केटेगिरी की जांच व्यवस्था अजमेर में होने से यहां पता नहीं लगाया जा सकता है।’ डॉ.राकेशमीणा, प्रभारी स्वाइन फ्लू रेस्क्यू टीम