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कथा से भक्ति की शुरुआत

7 वर्ष पहले
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नारायणआश्रम परिसर में अंतरराष्ट्रीय कथावाचक रमेशभाई ओझा ‘भाईश्री’ ने अपने आध्यात्मिक और बौद्धिक विचारों का अनूठा संगम को अपने वाणी के माध्यम से श्रवण कराया। कथा के बीच राजस्थान के जुगल मधुरी शरण महाराज द्वारा रचित गीत ‘म्हनै परदेशा क्यूं छोड्या, ले चाळो निज देश...’ भजन सुनाकर भक्ति सरिता बहा दी। उन्होंने बताया कि जिस तरह कत्था बगैर पान में लाल रंग नहीं आता, ठीक वैसे ही कथा बगैर जीवन में रंग नहीं आता। भक्ति की शुरुआत श्रवण से होती है और फिर कीर्तन किया जाता है। प्रेम करने योग्य केवल परमात्मा है। भाईश्री ने तेरी रहमते बेमिसाल है... भजन सुनाया। कथा में रावत भाटा से आई 9 साल की हरिश्री ने मंच पर भीष्म स्तुति, राम स्तुति हनुमान चालीसा सुनाई।

घरमें सभी ‘सेट’, लेकिन खुद ‘अपसेट’

भाईश्रीने कहा कि आज के समय में लोगों ने खुद को विलासिता के डूबा रखा है। घर में सोफा सेट, डायनिंग सेट... जैसे महंगे सामान मिल जाते है, लेकिन खुद अपसेट रहते है। इसे समझाते हुए बताया कि दुनिया में आने वाला हर व्यक्ति शांत है। सांसारिक कर्मों के ताप के कारण व्यक्ति अशांत हो जाता है। 24 घंटे व्यक्ति शांत रह सकता है, लेकिन लगातार गुस्से में नहीं रह सकता।

यूंसमझें विश्व सत्ता व्यवस्था

कथावाचकने कहा कि विश्व सत्ता ने हर व्यक्ति को बराबर प्रकाश, हवा इत्यादि जीने के साधन दिए हैं। जीने की आवश्यकता कभी अधूरी नहीं दी। लेकिन व्यक्ति अपने सुख-दुख का दाता कोई ओर नहीं व्यक्ति खुद है।

गुरुकरते हैं ‘हरिनाम’ का कन्यादान

भाईश्रीने कहा कि संसार में गुरू का पद परम है। गुरू व्यक्ति में व्याप्त सांसारिक विकारोंं का नाश करके अपने शिष्य का हाथ भगवान श्रीहरि को थमा देते हैं। उन्होंने समझाया कि जिस तरह एक बाप अपनी बेटी का कन्यादान करते हाथ उसके जीवन साथी थमाता है, ठीक वैसे ही गुरू भी अपने शिष्य को श्रीहरि के हवाले सौंप देते हैं।

नीलकंठमहादेव में जलाभिषेक किया

अंतरराष्ट्रीयकथावाचक रमेशभाई ने रविवार को ऋषि शृंगी की एतिहासिक तपोभूमि स्थित नीलकंठ महादेव तीर्थ स्थल स्थित महादेवजी का अभिषेक किया। ‘भाईश्री’ ने मंदिर के दर्शन किए और तीर्थस्थल की सुंदरता देखी। इसके साथ ही नीलकंठ परिसर में स्थित मां वैष्णोदेवी मंदिर का दर्शन किए। इस मौके पर सुभाष शर्मा, महेंद्रदीप बजाज, देवी शंकर भूतड़ा, अशोक खंडेलवाल, माणक जिंदल