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स्वच्छता के लिए खतरा बने डिस्पोजेबल

7 वर्ष पहले
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कोर्टके अादेश पर सरकार ने पर्यावरण को प्रदूषित कर रही प्लास्टिक थैलियाें पर भले ही रोक लगा रखी हो मगर शहर की स्वच्छता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा डिस्पोजेबल कप के रूप में माैजूद है। शहर की अधिकतर चाय की थड़ियों पर अब कुल्हड़ की बजाय डिस्पोजेबल कप काम में लाए जा रहे हैं। हल्के प्लास्टिक से बने कप ग्राहकों की सेेहत और शहर की सफाई दोनों के लिए खतरा बने हुए हैं। डिस्पोजल के उपयोग में लगातार बढ़ोतरी के चलते सड़कों नालों में कचरे गंदगी की भरमार हो रखी है। ऐसे में अब तक ना सिर्फ स्वच्छता अभियान का अपेक्षित लाभ मिल पाया और ना ही शहर में सफाई नजर आई।

हालात इतने गंभीर है कि हर रोज सुबह सफाई होने के बावजूद दोपहर तक फिर से गंदगी, कचरा कूड़े-करकट से सड़के नालियां अटी मिलती हैं। ब्यावर में वह जमाना बीत गया जब चाय की चुस्कियों में कुल्हड़ का साथ हुआ करता था। डिस्पोजल के बढ़ते क्रेज के साथ ना सिर्फ सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है, बल्कि शहर में कचरे के हालात बिगड़ते जा रहे है।

बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में बनने वाले प्लास्टिक डिस्पोजल ने पारम्पिरिक काम करने वाले परिवारों का रोजगार छीन लिया है। कुल्हड़ का उपयोग कम हो जाने से लोग चाय का स्वाद ही भूल गए हैं। अगर चाय में कुल्हड़ का उपयोग बढ़ें तो पारम्परिक व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और शहर भी साफ-सुथरा नजर आएगा। लेकिन बनाने वालों के सामने मिट्टी और जगह की समस्या रहती है।

खाद्य पदार्थों में उपयोग होने वाला पॉलीथिन या प्लास्टिक ही गंदगी फैलाने में सबसे बड़ा कारण बनता है। शहरी क्षेत्र में इसका उपयोग बहुत ज्यादा है। कचरा पात्र में नहीं डालकर खुले फैंका गया पॉलीथिन सबसे ज्यादा गंदगी फैलता हैं। इसके अलावा चाय में उपयोग आने वाली प्लास्टिक गिलासे नालियां को जाम करने का कारण भी बनती है।

कुल्हड़ काम लें तो बढ़ेगा रोजगार

गंदगी का सबसे बड़ा कारण

..इसलिए घटा कुल्हड़ का उपयोग

कुल्हड़को रखने के लिए ज्यादा जगह चाहिए और टूटने का डर रहता है। इसलिए प्लास्टिक या कागज के गिलास काम में लेते है। कुल्हड़ की समय पर सप्लाई नहीं हो पाती है।’’ -नेमीचंदचौहान, चायव्यवसायी।

मंहगीमिट्टी के कारण दुकानदारों के कुल्हड़ मंहगा लगता है। इसके अलावा तैयार कुल्हड़ों को दुकानों को पहुंचाने में टूट-फूट का डर भी रहता है। पश्तैनी व्यापार समय के साथ अब कम हो गया है। कभी