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मारपीट करने वालों से सख्ती से निपटेंगे अस्पताल के गार्ड
ब्यावर | प्रदेशके सबसे ज्यादा आउटडोर वाले राजकीय अमृतकौर अस्पताल में डॉक्टर एवं नर्सिंग स्टॉफ की सुरक्षा उतनी ही कमजोर है।
अमृतकौर अस्पताल में डॉक्टर, नर्सिंग स्टॉफ या अन्य किसी भी कर्मचारी से मारपीट और अभद्रता जैसी घटनाओं की पुनरावृति हो इसके लिए अस्पताल प्रबंधन हर संभव कदम उठाने पर विचार कर रहा है। इसके लिए अब अस्पताल में तैनात गार्ड कर्मचारियों से मारपीट करने वालों से सख्ती से निपटेंगे और साथ ही ऐसी घटनाओं के बाद अस्पताल प्रबंधन तुरंत थाने में मारपीट करने वाले के खिलाफ लिखित रिपोर्ट भी देगा। गौरतलब है कि हाल के दिनों में अस्पताल कर्मचारियों के साथ अभद्रता और मारपीट के मामलों में इजाफा हुआ है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन के रवैये को लेकर खुद कर्मचारियों में भी रोष रहता है। अभी तक ऐसी घटनाओं में अस्पताल प्रबंधन ज्यादातर मामलों में दोनों पक्षों में बात करवा कर सुलह करवाने का ही प्रयास करता है।
बढ़ेगीसुरक्षा गार्ड की संख्या : 300बेड के राजकीय अमृतकौर अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों, उपकरणों और मोर्चरी में शव को रखवाने से उसकी सुरक्षा के लिए मात्र 12 सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। पिछली बार मेडिकल रिलीफ सोसायटी की बैठक में सुरक्षा गार्ड की संख्यां बढ़ाने की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन अभी तक उस पर अमल नहीं हो पाया है। प्रतिदिन 1 हजार से ज्यादा आउटडोर वाले अमृतकौर अस्पताल में 20 गार्ड की जरूरत है। कुछ अर्से पहले तक अस्पताल में 19 सुरक्षा गार्ड तैनात थे, लेकिन कम वेतन मिलने के कारण वर्तमान में यहां 12 सुरक्षा गार्ड ही तैनात हैं।
तालेमें बंद है पुलिस चौकी : अस्पतालमें डॉक्टरों और कर्मचारियों से मारपीट के साथ ही अन्य अापराधिक वारदातें सामने आने पर जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अस्पताल में अस्थाई पुलिस चौकी स्थापित की गई। कुछ महीनों तक तो यहां पुलिस स्टॉफ तैनात रहा। लेकिन करीब एक साल से ये पुलिस चौकी ताले में ही बंद है।
इनकाकहना है
^डॉक्टरों,नर्सिंग कर्मचारियों के साथ ही मरीजों की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। घटना के बाद दो सुरक्षा गार्ड बढ़ा दिए गए हैं और अगली एमआरएस मीटिंग में 20 सुरक्षा गार्ड लगाने का प्रस्ताव है। सहायक पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर अस्पताल पुलिस चौकी को फिर से खुलवाने कर पर्याप्त जाप्ता लगवाने का प्रयास किया जाएगा। अस्पताल के किसी भी कर