चोरों के निशाने पर सूने मकान
{जहां तक हो सके घर को सूना ना छोड़ें।
{आवश्यक काम से जाना पड़े ताे पडौसियों को सूचना जरूर दें।
{घर में ज्यादा नगदी या ज्वेलरी ना रखे। नगद और ज्वेलरी बैंक में रखें।
{रात में बाहर रहना पड़े तो कोशिश करें कि किसी पडौसी को सुला दें।
{घर में सीसीटीवी कैमरे लगवाएं। एक कैमरा मैन गेट पर भी लगवाएं जहां से दूर तक कवरेज हो सके। अमुमन चोर ऐसे घरों में चोरी करने से बचते हैं जहां सीसीटीवी कैमरे हो।
{बाहर जाने से पहले संबंधित थाने और बीट कांस्टेल को जरूर जानकारी दें। पुलिस रात में उस घर पर विशेष नजर रख सके।
{दुपहिया वाहनों में व्हील लॉक लगवांए। जिससे वाहन की सुरक्षा हो सके।
भास्कर अलर्ट
भास्कर न्यूज | ब्यावर
शादियोंऔर छुटि्टयों का सीजन गया है। लेकिन अगर आप घर सूना छोडकर कहीं जा रहे हैं तो थोड़ा सोच समझकर ही निर्णय लें। क्योंकि शहर में हुई ज्यादातर चोरियों की वारदात में चोरों ने सूने मकानों को ही निशाना बनाया है। सूने मकानों में चोरी करने वाले शहर के आसपास के ही नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर के अपराधी भी शामिल हैं। हकीकत ये है कि रात में ही नहीं दिन दहाड़े भी चाेरियों की कई वारदातें हो रही है। इतना ही नहीं चोरों के निशाने पर दुकानें और वाहन भी रहते हैं।
चोरियों की वारदातें बढ़ने पर पुलिस की सफाई है कि चोरियों के मामले में लगातार संदिग्धों पर शिकंजा कस कर पूछताछ की जा रही है। मुखबिरों की इत्तला पर दबिश भी दी जा रही है। ज्यादातर वारदातें सूने मकानों में होने के कारण पुलिस का मानना है कि चोर सूने मकानों पर नजर रखते हैं और वारदातों को अंजाम देते हैं। सीएलजी मेंबर महेंद्र दीप बजाज का कहना है कि पुलिस की नफरी कम होने और थाना हल्का क्षेत्र ज्यादा होने के कारण पूरे इलाके में गश्त करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि थानों में पुलिस जवानों की संख्या को बढ़ाया जाए और साधन भी दिए जाएं जिससे की समय पर गश्त पुख्ता हो, जिससे की चोरियों की वारदातों पर अंकुश लगाया जा सके।
ऐसेचुनते हैं सूने घर...
दिनमें फेरी वाले या अन्य बाहानों से चोर कॉलोनियों में घूमते हैं और ऐसे मकानों की टोह लेते हैं जिसके बरामदे में अखबार पड़े हों। गाड़ियों और बरामदे में धूल पड़ी हो तो सूने घर की निशानी है। दिन में भी बाहर की लाइट जल रही हो तो चोर ऐसे मकान को टारगेट कर लेते हैं। बातों बातों में चाेर पडौसि