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भगवान आदिनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया

6 वर्ष पहले
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भगवान के जन्मोत्सव पर मनाई खुशियां

पंचकल्याणक महोत्सव के तहत जन्म कल्याण अत्यंत उत्साह उमंग के साथ मनाया गया। तीर्थकर आदि प्रभु का सुमेरु पर्वत पर जन्माभिषेक पूर्वक जन्मोत्सव की खुशियां प्रकट हुई इंद्रों ने स्वर्ग से आकर भक्ति नृत्य किया। दूर दराज क्षेत्रों से आए जनसमुदाय ने जन्मदिवस की बधाइयां गाईं। इस अवसर पर माता जी ने बताया कि जब तीन लोक के नाथ प्रभु का जन्म होता है तो तीनों लोकों में यहां तक नरकों में भी क्षण भर के लिए शांति छा जाती है। उन्होंने नारी की व्याख्या करते हुए कहा कि संसार का प्रारंभ जन्म से होता है। और प्रत्येक प्राणी का जन्म नारी से होता है। नारी गुणों की पुंज है। क्योंकि नारी आज से नहीं प्राचीन काल से नर के लिए उत्थान की सीढ़ी बनी हुई है। जिस प्रकार सीता आदि जितनी भी सतियां हुई हैं उन्होंने अपने पतियों के सामने कष्ट आने पर उनका साथ दिया। जिस प्रकार दिशाएं तो अनेक हैं लेकिन लेकिन पूर्व दिशा अनोखी है। जो सूर्य को उदित करने वाली है। उसी प्रकार नारी तो संसार में अनेक हैं लेकिन धन्य है वह माता मरुदेवी जो त्रिलोक पूज्य आदि प्रभु को जन्म देने वाली है। नारी कन्या के रूप में मंगलमय होती है। यौवन अवस्था में नर की सहगामिनी बनती है। और माता की अवस्था में आने पर वात्सल्य का सागर उड़ेलने वाली है। वृद्ध होने पर ईश्वर के समान हैं। अमित गोधा ने बताया कि सोमवार को तप कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

ब्यावर. मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन रविवार को निकाली गई शोभायात्रा में मौजूद महिलाएं। कार्यक्रम की प्रस्तुति देती बालिकाएं।