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जिले के 20 स्कूलों में चलेगा उत्कर्ष प्रोग्राम

7 वर्ष पहले
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सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी अब खेल-खेल में कम्प्यूटर के माध्यम से अपने ज्ञान का आंकलन कर सकेंगे। इससे शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार आएंगे। यह सब उत्कर्ष प्रोग्राम के तहत होगा। प्रथम चरण में जिले की 20 सरकारी स्कूलों का चयन किया है।

इस संबंध शनिवार कलेक्ट्रेट में कलेक्टर वेदप्रकाश की अध्यक्षता में मीटिंग हुई। कलेक्टर ने उत्कर्ष प्रोजेक्ट क्विज बेस्ड लर्निंग सिस्टम के संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बताया कि यह केबीसी की तर्ज पर कार्य करता है। विद्यार्थी इसे ऑनलाइन और आफ लाइन दोनों तरह से आपरेट कर सकते है। लॉग इन करते ही विषयवार प्रश्न खुल जाते है। ये प्रश्न वस्तुनिष्ठ होते हैं, जिनके चार विकल्प होते है। हर प्रश्न को हल करने के लिए दो अवसर दिए जाते है। इसके बाद ही मार्किंग होगी। परीक्षा पूरी होने के बाद अंक जुड़ जाते है और इसी से बच्चे की शैक्षिक स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है। कलेक्टर ने बताया कि प्रथम चरण में जिले के 20 स्कूलों का चयन किया है। जहां पर पर्याप्त मात्रा में कम्प्यूटर तथा नेट सुविधा है। चित्तौडग़ढ़ में तीन, निम्बाहेड़ा, गंगरार, कपासन, राशमी, भूपालसागर, बड़ीसादड़ी, बेगूं, रावतभाटा में दो-दो, भदेसर में एक स्कूल में प्रोजेक्ट उत्कर्ष सिस्टम व्यवस्था लागू होगी। इसमें एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम, जो राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में संचालित है, उसके कक्षा नौ के छह विषयों यथा हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन संस्कृत का चयन किया गया है। इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए सात सदस्यीय कोर कमेटी का गठन किया गया है। इसमें जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक प्रारंभिक, अति. जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक एवं प्रारंभिक, प्रधानाचार्य शहीद मेजर नटवरसिंह राउमावि प्रधानाचार्या राबाउमावि शहर सदस्य होंगे। जिला कम्प्यूटर प्रशिक्षण संस्थान के प्रभारी नव कुमार दशोरा ने उत्कर्ष प्रोजेक्ट का पावर प्वाइंट प्रेजेन्टेशन के माध्यम से कक्षा नौ के विषयवार आपरेशन एवं संचालन के बारे में जानकारी दी।

मीटिंग में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जगवीर सिंह, डीईओ माध्यमिक मुरारीलाल शर्मा, रामसा के एडीपीसी सत्यनारायण शर्मा, एडीईआे राजेंद्र कुमार शर्मा एवं शांतिलाल सुथार सहित माध्यमिक शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारी मौजूद थे।

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