जीवन में सत्संग जरूरी
बेगूं. प्रभुप्राप्ति में त्याग समर्पण भाव हाेने चाहिए। सत्संग से यह लोक ही नहीं बल्कि परलोक भी सुधर जाता है। यह विचार पंडित राजेश राजोरा ने सेवाराम डिडवानिया चंद्रशेखर डिडवानिया की स्मृति में आयोजित भागवत कथा के समापन पर व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि कृष्ण-सुदामा की मित्रता निस्वार्थ थी। आज की मित्रता में अधिकाशंतः स्वार्थ छिपा रहता है। इस अवसर पर कई आयोजन हुए तथा कृष्ण-सुदामा की झांकी सजाई गई।