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कालिका पूज कर लगाया पहला चीरा, फसल पर रोग की छाया भी

5 वर्ष पहले
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वसंतकी दस्तक के साथ मेवाड़, मालवा और हाड़ौती में अफीम की भीनी-भीनी गंध ने भी मादकता घोल दी है। यह फसल अब पूरे यौवन पर है। कुछ किसानों ने मंगलवार को गुप्त नवरात्रि के साथ डोडों पर पहली चीर लगा दी है। काला सोना मानी जाने वाली अफीम को हर काली नजर से बचाने के लिए जतन भी चरम पर है। किसान परिवारों ने अब दिन-रात खेतों पर ही पड़ाव डाल दिया है। पगडंडी पर ही मां काली की पूजा कर पहला चीरा लगाया गया। हालांकि काली मस्सी जैसे रोग और मौसम की प्रतिकूलता ने कई किसानों के चेहरों के नूर बिगाड़े हुए भी हैं। ऐसे में जहां कई किसान चिराई-लिवाई की तैयारी में हैं तो कुछ किसान फसल हंकवाने की भी सोच रहे हैं।

निंबाहेड़ा क्षेत्र के रठांजना गांव में किसान जसवंत सिंह पुत्र कुन्दन सिंह ने मंगलवार सुबह 11 बजे कालिका माता की पूजा अर्चना कर अफीम डोडों पर चीरा लगाना प्रारंभ किया। कुल 25 आरी में डोडों को चीरा लगाने के लिए फसल को तीन भागों में विभाजित किया। जिनमें क्रमश एक-एक दिन चीरे लगेंगे और अगले दिन लिवाई यानी दूध लेंगे। तीन भागों में विभक्त करने से अफीम दूध लुआई में आसानी रहती है। मंगलवार को चीरे लगे डोडों से बुधवार सुबह सात बजे से दूध निकाले जाने लगा। इस परिवार में पूर्वजों से अफीम की खेती हो रही है। रठांजना में कुल 28 किसान दो मुखिया हैं। डोडों की चिराई कार्य के साथ ही किसान परिवारों ने अपना डेरा खेतों पर डाल लिया है।

10 दिन में दे फसल हंकवाने का आवेदन | केंद्रीयनारकोटिक्स विभाग ने भी मंगलवार को ही आदेश प्रसारित कर कहा कि प्राकृतिक आपदा या अन्य कारण से जो किसान अपनी फसल हंकवाना चाहते हैं, वे 10 दिन में इसकी अर्जी संबंधित जिला अफीम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें। क्षतिग्रस्त फसल के आकलन का कोई प्रावधान नहीं है। इसके लिए आवश्यक नियम प्रावधान बता दिए गए।

निंबाहेड़ा |रंठाजना केएक खेत में कालिका माता का पूजन कर डोडा पर चीरा लगाने की शुरुआत करते किसान।

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