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डिसमेंटल की अनुमति नहीं मिलने से अटका खालों का पुनर्निर्माण

7 वर्ष पहले
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हनुमानगढ़. सिंचित क्षेत्र विकास, इंदिरा गांधी नहर परियोजना (सीएडी) की ओर से नोहर-भादरा क्षेत्र में बनाए गए पुराने खाले काश्तकारों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। इनमें से कई क्षतिग्रस्त खाळे इतनी बुरी स्थिति में हैं कि उन्हें तोड़कर दोबारा बनाए जाने की जरूरत है।
ग्राम पंचायतों की ओर से इस संबंध में जिला परिषद को प्रस्ताव भिजवाए जाते हैं और इसके लिए बजट भी उपलब्ध हैं लेकिन तकनीकी पेच के चलते इनका पुनर्निर्माण नहीं हो पा रहा। विभागीय औपचारिकताओं का खामियाजा काश्तकारों को भुगतना पड़ रहा है और उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। मामला कई बार जिला परिषद की बैठकों में भी उठा है लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।

यह है दिक्कत

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक खालों को तोड़कर नए सिरे से बनाने के लिए सीएडी की मंजूरी आवश्यक है क्योंकि किसी भी विभाग की ओर से बनाई गई संपत्ति को बिना मंजूरी के नहीं तोड़ा जा सकता। उधर, सीएडी के अधिकारियों का कहना है कि उनकी ओर से निर्माण के बाद सभी खाले चक समितियों के सुपुर्द कर दिए जाते हैं।
ऐसे में चक समितियां अपने स्तर पर क्षतिग्रस्त खालों को तोड़कर पुनर्निर्माण करवा सकती हैं। खास बात यह है कि सीएडी के अधिकारी यह बात मौखिक रूप से ही कहते हैं और विभाग की ओर से इस संबंध में कोई लिखित दिशा-निर्देश नहीं हैं। ऐसे में मनरेगा के तहत बजट होने के बावजूद खालों का पुनर्निर्माण नहीं हो पा रहा।