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ढाई साल में आधी स्कूलों की फीस भी तय नहीं

6 वर्ष पहले
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भरतपुर। राज्य फीस निर्धारण कमेटी की ढिलाई अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। फीस निर्धारण एक्ट को लागू हुए करीब ढाई साल का समय बीत चुका है। लेकिन अभी तक जिले के 50 प्रतिशत स्कूलों की भी फीस निर्धारित नहीं हो सकी है। खास बात यह है कि 370 स्कूलों की फीस की सूची भी तब जारी की, जब अभिभावक सत्र की ज्यादातर फीस का भुगतान कर चुके हैं।

स्कूलों की फीस निर्धारण होने वाले संचालकों का कहना है कि सरकार ने वर्ष 2011-12 की रिपोर्ट के आधार पर फीस निर्धारित कर दी जो बहुत कम है। उधर फीस निर्धारण कमेटी का मानना है कि विभाग ने जैसी सूचना मिली उसके आधार पर फीस निर्धारित की है। जिले में प्रारंभिक माध्यमिक शिक्षा के 1374 निजी स्कूल संचालित हैं।

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ढाई साल में आधी...

इनमें1104 स्कूलों की फीस पत्रावलियों को जिला फीस निर्धारण कमेटी अनुमोदित कर राज्य फीस निर्धारण कमेटी के पास भेज चुकी है। लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी इन स्कूलों की फीस निर्धारित नहीं हो सकी है। करीब 209 स्कूलों ने फीस संबंधित सूचनाएं अब तक नहीं भेजी हैं। इनको विभाग नोटिस भी जारी कर चुका है।
फीस कमेटी द्वारा तय फीस से ज्यादा वसूली होने पर संबंधित स्कूलों से बकाया राशि के वापसी का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में फीस निर्धारण की धीमी रफ्तार अभिभावकों के लिए परेशानी बन रही है।
फीस निर्धारण में भेदभाव किया जा रहा है। स्कूल चलाना भी मुश्किल हो रहा है। ऐसे रहा तो स्कूल ही बंद हो जाएंगे। स्कूलों का खर्च निकालना ही चुनौती बन गया है।

हरभानसिंह कुंतल

अध्यक्ष निजी स्कूल एसोसिएशन

फैक्ट फाइल

{1374स्कूल वेबपोर्टल पर पंजीकृत

{370 की फीस का निर्धारण

{209 ने नहीं दी फीस निर्धारण की फाइल

^कमेटी तो पोर्टल पर लॉक स्कूलों की फीस संबंधी फाइल राज्य कमेटी को भेज चुकी है। वहीं से ही फीस निर्धारण किया जाएगा। सियारामफौजदार, अध्यक्ष फीस निर्धारण कमेटी

फीस निर्धारण प्रक्रिया के बाद किस पर क्या असर रहेगा

प्राइवेटस्कूलों के लिए : प्राइवेटस्कूल संचालकों का तर्क है कि विभाग ने स्कूलों की सुविधाएं नहीं देखी और भौतिक सत्यापन भी नहीं किया। बिना देखे ही फीस निर्धारित कर दी। इससे कम फीस निर्धारित हुई। इसलिए सवाल उठा रहे हैं।

अभिभावकोंके लिए : स्कूलसंचालक अगले तीन साल तक फीस नहीं बदल सकेंगे। कई स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने उपलब्ध सुविधाओं से ज्यादा सूचना भी दे दी। सरकार ने उनका भौतिक सत्यापन नहीं किया और फीस निर्धारित कर दी। अभिभावकों को ज्यादा पैसा देना पड़ेगा।

शिक्षाविभाग के लिए : आधेस्कूल संचालक सहमत नहीं है। उनका पक्ष है कि इसका रिव्यू किया जाए। इस सत्र में संचालकों को फीस भी दे दी जबकि कमेटी का दावा था कि ज्यादा फीस नहीं ली जाएगी।

ये है एक्ट

निजीस्कूलों पर नकेल कसने के लिए विद्यालय फीस संग्रहण विनिमय एक्ट अगस्त 2013 से लागू किया गया। इसके तहत सरकार ने निजी स्कूलों की फीस तय करने के लिए पूर्व न्यायाधीश शिवकुमार शर्मा की अध्यक्षता में एक राज्यस्तरीय फीस निर्धारण कमेटी गठित की। यही कमेटी विभाग से मिली सूचनाओं के आधार पर निजी स्कूलों की फीस निर्धारित कर रही है।