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खाली कुर्सियां बयां कर रही थीं कांग्रेस की उदासी

6 वर्ष पहले
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भरतपुर। चार-पांच दिन से आबाद कांग्रेस का खेमा आज अलसुबह निराशा की ओस में भीगा था। कारण पार्टी उम्मीद के मुताबिक सीटें नहीं जुटा पाई। कांग्रेस को 37 में से 11 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। इसलिए सुबह होते-होते कांग्रेस के डेरे में सन्नाटा पसर गया था। चूंकि वॉक ओवर नहीं जाए इसलिए जरूरी मंत्र देकर पर्यवेक्षक ब्रजकिशोर शर्मा भी दिन चढ़ने से पहले ही जयपुर चले गए।

कांग्रेस पार्टी की ओर से नामांकन दाखिल किया गया, किंतु वह रस्म अदायगी थी, क्योंकि कांग्रेस प्रत्याशी मीना सिंह की ओर से दायर नाम निर्देशन पत्र में प्रस्तावक का नाम और हस्ताक्षर ही नहीं थे। इसलिए नामांकन पत्र खारिज होना ही था।
इस पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष गिरीश चौधरी ने कहा कि तकनीकी भूल के कारण ऐसा हुआ, लेकिन हकीकत ये है कि पार्टी ने चुनाव नहीं लड़ने का मानस एक दिन पहले ही बना लिया था और रात में कांग्रेस समर्थित दो सदस्य के भाजपा खेमे में चले जाने के कारण चुनाव नहीं लड़ना लगभग तय हो गया था, किंतु कार्यकर्ताओं और आमजन में गलत मैसेज नहीं जाए इसलिए नामांकन दाखिल करना तय हुआ और उसमें कमी छोड़ना भी।

यही कारण है सुबह 10.30 बजे कांग्रेस कैंपस लगभग खाली पड़ा था। छितराई पड़ी खाली कुर्सियां खेमे में पसरी उदासी को बयां कर रही थीं।