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छात्र संख्या के आधार पर होंगी कक्षाएं

6 वर्ष पहले
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शिक्षाका अधिकार (आरटीई) के तहत आने वाले राजकीय स्कूल के भवनों में कितने कमरे होंगे, इसका निर्णय अब उस विद्यालय की छात्र संख्या के अनुसार किया जाएगा। इसके लिए राज्य प्रारंभिक शिक्षा परिषद ने सभी जिले के सरकारी विद्यालयों के लिए नई गाइड लाइन जारी की है। जिन विद्यालयों में जरूरत के अनुसार कमरे नहीं होंगे, वहां नए क्लास रूम का निर्माण कराया जाएगा।

परिषद की ओर से जारी निर्देशों में बताया गया कि 30 छात्रों पर रोशनदान खिड़कियों युक्त एक क्लास रूम की व्यवस्था होनी चाहिए। विद्यालय के अंदर पीने का पानी, टॉयलेट, पोषाहार के लिए रसोई रैंप और चारदीवारी जैसी सभी मूलभूत व्यवस्थाएं होना अनिवार्य है। छात्र संख्या को देखते हुए स्कूलों में शिक्षकों और हेडमास्टरों की व्यवस्था भी की जाएगी। जरूरत के अनुसार सभी विद्यालयों को सरकार बजट जारी करेगी। जिले में प्रारंभिक शिक्षा के अधीन करीब 1800 से अधिक स्कूल संचालित थे। एकीकरण के बाद 647 प्राथमिक 603 उच्च प्राथमिक स्कूलों का संचालन हो रहा है। शिक्षा विभाग भवनों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए नए नियम लागू कर रहा है।

^पहलेआवश्यकता के हिसाब से प्रस्ताव चले जाते थे। लेकिन अब डाइस आरटीई नोर्मस के आधार पर ही स्कूलों में कमरा निर्माण के प्रस्ताव भेजे जा सकेंगे।

-जीवनसिंहमीणा, एईएनएसएसए

जर्जर भवन के स्थान पर बनेगी नई इमारत

जोनिर्देश जारी किए गए हैं उसमें यह स्पष्ट है कि जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए बजट नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसे पूरी तरह से गिराकर स्कूल के लिए नई इमारत तैयार कराई जाएगी।

ब्लॉक स्तर पर बनेगी विद्यालयों की सूची

विद्यालयकी जरूरत के अनुसार संस्था प्रधान बजट के लिए मांग करेंगे। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर रिपोर्ट तैयार कर पूरे जिले के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। परिषद की ओर से निर्माण के लिए बजट जारी किया जाएगा।