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वेद पुराणों के संदेश पर शिक्षाविदों का मंथन
राजस्थानसंस्कृत अकादमी संस्कृत विभाग की ओर से एमएसजे कॉलेज में हुई दो दिवसीय अखिल भारतीय संगोष्ठी में देशभर से आए वक्ताओं ने धार्मिक ग्रंथों के आधार पर मानव मूल्यों की उपयोगिता बताकर श्रोताओं को आत्मिक मूल्यों का ज्ञान कराया।
कार्यक्रम में प्रो. राजेश्वर मिश्र ने कहा कि पुराण साहित्य मानव जीवन का पथ प्रदर्शक है। ये साहित्य धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को जीवन में कैसे प्राप्त किया जाए, इसका रास्ता बताते हैं। भागवत पुराण में धर्म का प्रवचन है। यह तो सब जानते हैं, किंतु महर्षि व्यास ने इस पुराण में अर्थ का अर्जन यानि कैसे कमाया जाए। इस तथ्य पर विस्तार से विचार किया है। एम एसजे कॉलेज के उपाचार्य डॉ. कमलनयन शर्मा ने पुराण एवं इतिहास बोध विषय पर विचार रखे। डॉ. अनंतराम शर्मा ने कहा कि पूर्वाग्रह से मुक्त होकर पुराण को पढऩे पर बल दिया। तभी जाकर ज्ञान के महासागर से र| प्राप्त कर सकते हैं।
पूर्व अध्यक्ष ब्रजभाषा अकादमी डॉ. कृष्णचंद्र गोस्वामी ने पुराणों एवं भक्ति काव्यों में प्रतिपादित लोक संग्राहक तत्वों पर प्रकाश डाला। डॉ. योगेंद्र भानु ने बताया कि संगोष्ठी के दूसरे दिन के 2 तकनीकी सत्रों सहित कुल छह तकनीकी सत्रों का आयोजन हुआ। इसमें 67 शोध पत्र पढ़े गए। प्राचार्य डॉ. लखनपाल शर्मा की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में संचालन डॉ. एनडी शास्त्री प्रो. सीएम कोली ने किया। डॉ. बाबूलाल मीना ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में उपाचार्य डॉ. रमाकांत चतुर्वेदी, डॉ. एमके धवन, डॉ. बीके गुप्ता, डॉ. पारस जैन, डॉ. प्रतिभा द्विवेदी, डॉ. अलका अग्रवाल, डॉ. सुनीता कुलश्रेष्ठ, डॉ. उषा रानी, डॉ. मीरा देवी, डॉ. सतीश त्रिगुणायत, डॉ. धर्मेंद्र मीना, डॉ. राजकुमारी, डॉ. सीएल महोलिया, डॉ. जयश्री, डॉ. शिल्पी माथुर, सुंदरसिंह प्रहलाद कुमार आदि उपस्थित थे।
दूसरों के मानव मूल्यों की रक्षा करें
अंजनागोयल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जितने भी युद्ध लड़े उनमें दूसरों के मानव मूल्यों की रक्षा का भाव था। उन्होंने जरासंध का वध इसलिए किया, क्योंकि जरासंध ने दूसरों के मानव मूल्यों का विनाश करना शुरू कर दिया था।
धन अर्जन और व्यय कैसे करें
संगोष्ठीमें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी संस्कृत विभाग के प्रो. राजेश्वर मिश्र ने बताया कि भागवत कथा में धन अर्जन को लेकर श्रीकृष्ण ने काफी कुछ उल्लेख किया है। अनीति से प्राप्त धन नष्ट होता है और व्यक्ति का भी नाश करता है। श्रीकृष्ण ने नंदबाबा को बताया था कि अर्जित आय का छठा हिस्सा राजा, एक धर्म का, एक अन्य परिवारजनों, शेष हिस्सा स्वयं के बच्चों परिवार के लिए होना चाहिए। जो धन परिवारजनों को सुख नहीं दे सकता है, वह धन महत्व का नहीं रहता। भागवत में ही एक कंजूस ब्राह्मण की कथा संदेश देती है कि धन 15 प्रकार के दोष साथ लेकर आता है जो इन दोषों से बचता है, वहीं श्रेष्ठ कहलाता है।
भरतपुर. अखिल भारतीय संगोष्ठी में मौजूद प्रतिभागी।
पैदा करें उसका ही उपयोग करें
डॉ.गुंजन गर्ग ने कहा कि श्रीकृष्ण ने सभी कथानक में कहा है कि व्यक्ति जिस वस्तु को पैदा कर सकता है, उसे उसका ही उपयोग करना चाहिए। जो वस्तु पैदा नहीं की जा सकती है, उसका उपयोग करने पर पर्यावरण का नाश होता है। जैसे पौधा लगाकर लकड़ी पैदा होती है। लेकिन कोयले के बाद कुछ नहीं होता। पेट्रोल-डीजल उपयोग से पर्यावरण का नाश होता है।