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गड्ढों मेंं तब्दील नेशनल हाइवे की सड़कें

7 वर्ष पहले
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धौलपुर डिपो के पास वैसे ही बसों का टोटा है और ऊपर से मुख्यमंत्री प्रधान मुख्यालय के निर्देशानुसार पर नई बसों की खरीद पर रोक होने से रोडवेज हर रोज खस्ताहाल बसों को दुरुस्त करा काम विभिन्न रूटों पर बस चलाने की मशक्कत में लगा हुआ है। हाईवे की जर्जर सड़कों पर से प्रतिदिन बसें के पंक्चर होने, कमानी नक्का टूटने से प्रतिदिन 2-3 खराब हो रही है। ऐसे में बीच रास्ते में लंबी दूरी के रूट निरस्त भी हो रहे हैं। ऐसे में बसों की मरम्मत में सामान की कमी से बसें कई कई दिनों तक मरम्मत के अभाव में डिपो में खड़ी रहती हैं। इस कारण कई रूट प्रभावित होते हैं। जिले से सटे दो नेशनल हाईवे की सड़के गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। इस कारण हर रोज बसों के टायर पंक्चर हो रहे हैं और यात्री भी हिचकोले खाकर भगवान काे याद कर सफर करने को मजबूर हैं।

सरमथुरा से करौली नेशनल हाईवे और सैंपऊ से वाया रूपवास भरतपुर मार्ग भी जीर्ण शीर्ण होने से बसें डिपो में मरम्मत के लिए पहुंचती है। रोडवेज प्रशासन को इन रूटाें पर चलने वाली बसों के कमानी नक्के टूटने से बसों की मरम्मत में प्रतिदिन चार हजार का अतिरिक्त खर्चा रहा है। ऐसे में बसों के समय पर रिपेयर नहीं होने के कारण लंबी दूरी के मार्गों के लिए बस को निरस्त करना भी पड़ रहा है। करौली मार्ग पर रोडवेज की प्रतिदिन 20 बसें संचालित हैं। इसी प्रकार भरतपुर रूट पर भी प्रतिदिन 18 बसें सैंपऊ रूपवास होते हुए चलाई जा रही हैं। इन दोनों ही रूटों पर कुछ ही दूरी पर सड़कों पर गहरे गड्ढ़े होने से टायर पंक्चर होने या कमानी टूट जाने से यात्रियों को सफर के दौरान काफी परेशानी हो रही है। रोडवेज डिपो के मैनेजर ऑपरेशन पुनीत कुमार द्विवेदी ने बताया कि टायर पंक्चर होने, कमानी, नक्के टूटने से प्रतिदिन मरम्मत में प्रतिदिन 3 से 4 हजार रुपए का अतिरिक्त खर्चा रहा है। वहीं सड़क खराब होने की वजह से बसों की रफ्तार कम होने से भी डीजल का खर्च भी ज्यादा रहा है। उन्होंने बताया कि वैसे तो अमूमन डीजल का औसत रूप से खर्च एक लीटर प्रति पांच किलोमीटर के हिसाब से आता है। मगर हाईवे की जर्जर सड़कों की वजह से चार से साढ़े चार किलोमीटर का एवरेज रहा है। धौलपुर डिपाे के मुख्य प्रबंधक पीडी शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन चार से पांच बसों में पंक्चर होने, कमानी नक्का टूट रहे हैं।

सैंपऊ. गड्ढों को भरने का कार्य करते मजदूर।