- Hindi News
- सिमको के दस कर्मचारियों को भुगतान के आदेश
सिमको के दस कर्मचारियों को भुगतान के आदेश
श्रमन्यायालय के न्यायाधीश अभय जैन ने सिमको के 10 कर्मचारियों के केसों में 33 लाख 92 हजार 990 रुपए दावा दायर करने के वर्ष 1988 से 12 प्रतिशत ब्याज देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही सिमको फैक्ट्री की डीवी अपील 20 मार्च 2002 को खारिज होने से 18 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज श्रमिकों मृतकों के वारिसान को दिए जाने के आदेश दिए हैं।
श्रमिकों के वकील बृजेंद्र बिहारी शर्मा ने बताया कि न्यायालय ने पचास पेज के अहम फैसले में सिमको फैक्ट्री के मैनेजमेंट द्वारा केस में बार-बार दर्खास्त लगाकर लम्बा करने का भी दोषी मानते हुए श्रमकों को 75 हजार रुपए का हर्जाना भी दिलाए जाने के आदेश दिए हैं। वकील शर्मा ने बताया कि प्रकरण के तथ्य इस प्रकार हैं कि सिमको फैक्ट्री मैनेजमेंट ने सिमको में कार्यरत 10 मालियों को अपना स्थाई कर्मचारी दिखलाकर उनका शोषण करने के लिए उन्हें ठेकेदार का श्रमिक दिखाया जाता रहा। इंटक यूनियन के महामंत्री अशरफी नारायण सिंह ने इस विवाद को 1985 में उठाया, जिसका निर्णय 1 अक्टूबर 96 को श्रम न्यायालय में हुआ। सभी दस मालियों को एक अप्रैल 1979 से नियमित वेतनमान सभी प्रकार के सेवा लाभ दिए जाने के आदेश दिए थे। इस निर्णय के विरुद्ध 27 जुलाई 98 को सिंगल बैंच से सिमको की रिट खारिज हुई। सिमको ने पुन: डीबी में अपील की, जो 19 मार्च 2002 को खारिज हो गई, परंतु सिमको मैनेजमेंट का उक्त श्रमिकों के साथ अन्याय जारी रहा और इन्हें अपने रॉल पर नहीं लिया तथा ही इन्हें स्थाई कर्मचारी का वेतन दिया। इस पर श्रमिकों की ओर से बृजेंद्र बिहारी शर्मा एडवोकेट ने स्थाई कर्मचारी के वेतन के लिए क्लेम लगाए। केस के दौरान दो श्रमिकों की मौत हो गई, जिनके वारिसान को पक्षकार बनाया गया था। जिसमें 18 सितंबर को फैसला दिया है।