शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने का जतन
भरतपुर.बुध कीहाट निवासी लक्ष्मीनारायण गोपालिया शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने को प्रतिबद्ध हैं। वे लुप्त होती ताल बंदी, ध्रुपद गायन को बढ़ावा देने के लिए पिछले पैंतालीस सालों से जतन कर रहे हैं। 64 वर्षीय गोपालिया को बचपन से ही संगीत का माहौल मिला। उनके पिता बिहारीलाल भी लोक गायन में रुचि रखते थे और अपने घर पर होली पर रसिया, तालबंदी गायन का वृहद आयोजन करते थे। इसलिए उनके घर पर संगीत के उस्ताद मोतीलाल,महेंद्र पारखी, बाबूलाल पलवार आदि का आना-जाना बना रहता था। इन्हीं से लक्ष्मीनारायण गोपालिया ने वायलिन, दिलरूबा, तबला वादन सीखा और शास्त्रीय संगीत में रम गए। नए कलाकारों को मौका देने के लिए वर्ष 1967 से स्वर गुंजन संस्था के माध्यम से शास्त्रीय संगीत एवं ध्रुपद गायन का नियमित आयोजन करते हैं। संस्था द्वारा रंगपंचमी पर बड़ा आयोजन किया जाता है। व्यवसाय से जुड़े रहे लक्ष्मीनारायण गोपालिया, पिछले दस साल से कारोबार में कम और संगीत आयोजनों में ज्यादा रुचि रखते हैं। गोपालिया नए कलाकारों को मौका मिले, इसके लिए लगातार जतन करते हैं। संस्था के मार्फत गुरु-शिष्य परंपरा को बढ़ावा दे रहे हैं। गोपालिया कहते हैं कि शास्त्रीय संगीत में अनुराग है, आनंद है। इसलिए नई पीढ़ी इससे रूबरू होना बहुत जरूरी है। इसके लिए संस्थागत प्रयास जरूरी है। इसी में थोड़ा सा जतन हम कर रहे हैं।
भरतपुर. तालबंदी गायन करते लक्ष्मीनारायण गोपालिया। फाइल फोटो