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जिले के ग्रामीण स्कूलों को बनाएंगे स्वच्छ
जिलेके राजकीय माध्यमिक उच्च माध्यमिक स्कूलों में बच्चों को साफ-सुथरा रखने के लिए साबुन, आइना, नेलकटर आदि सुविधाएं रहेंगी।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत ग्रामीण इलाकों में स्थित 340 स्कूलों को चार-चार हजार रुपए का स्वच्छता अनुदान बजट दिया है। इससे पहले दो माह के एक हजार रुपए दिए जा चुके हैं। स्कूलों को यह बजट प्रति माह पांच सौ रुपए के हिसाब से दस महीने के लिए आवंटित किया गया है। इस बार 10 महीनों के लिए बजट जारी किया गया है। पांच सौ रुपए प्रतिमाह के हिसाब से स्कूलों में स्वच्छता के काम होंगे।
इस बजट से पांच सौ रुपए की बाल्टी मग, सौ रुपए के नेलकटर, चार सौ रुपए के कचरा पात्र, हाथ धोने के लिए एक हजार रुपए के साबुन, सफाई कर्मचारियों के लिए दो हजार रुपए तथा पानी की टंकी साफ करने के लिए चार सौ रुपए दिए जाएंगे। संबंधित संस्था प्रधान यह सुनिश्चित करेंगे कि विद्यालय बिल्कुल साफ रहें।
340 स्कूलों को चार-चार हजार रुपए स्वीकृत, पहले एक-एक हजार दे चुके, 10 महीनों के लिए है बजट
योजना
चाय-नाश्ते में खर्च नहीं कर सकेंगे बजट
बच्चोंको पोषाहार खिलाने से पहले तथा बाद में साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। स्कूलों में आइना कंघा भी रखें ताकि बच्चे खुद को स्वच्छ रह सकें। बजट से जलपान, चाक-डस्टर, स्टेशनरी, खेल सामग्री, बिजली के बिल का भुगतान नहीं किया जा सकेगा। सभी संस्था प्रधानों को शैक्षणिक सत्र समाप्त होने पर यह बताना होगा कि यह पैसा स्वच्छता के लिए ही खर्च हुआ है।
बाल संसद करेगी मॉनिटरिंग
सरकारीस्कूलों में कार्यरत बाल संसद स्वच्छता अनुदान के बजट पर निगरानी रखेगी। इसमें सप्ताह के प्रतिदिन बाल संसद के प्रतिनिधि एक शिक्षक मिलकर स्वच्छता अभियान की गतिविधियों को आयोजित कराएंगे। बाल संसद के यह प्रतिनिधि सुनिश्चित करेंगे के शौचालय पर ताला नहीं लगना चाहिए। बच्चों को पोषाहार खाने से पहले हाथ धोने के लिए साबुन मिले। पानी की टंकी की नियमित सफाई हो, इस काम की मॉनिटरिंग भी की जाएगी। संस्था प्रधान की ओर से सफाई को लेकर विशेष मॉनिटरिंग की जाएगी। इसकी रिपोर्ट डीईओ को भी देनी होगी। निरीक्षण के दौरान खुद डीईओ भी स्वच्छता देखेंगे।