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लोहागढ़ स्टेडियम में अंधेरे से खिलाड़ी परेशान
संभागस्तर पर खेलों का अभ्यास करने के लिए सरकार ने 70 बीघा जमीन में लोहागढ़ स्टेडियम का निर्माण कराया।
खेलों के विकास के लिए यहां करीब ढाई करोड़ की लागत का इंडोर कुश्ती हॉल, एक करोड़ की लागत का इंडोर बैड मिंटन हॉल, करीब तीन लाख रुपये की लागत की बॉक्सिंग रिंग बनाई गई, लेकिन स्टेडियम में विद्युत कनेक्शन की ओर किसी का ध्यान नहीं गया। नतीजतन खिलाड़ियों को सुबह एवं शाम के समय अभ्यास करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोहागढ़ स्टेडियम में इंडोर बैड मिंटन हॉल, इंडोर कश्ती हॉल, बॉक्सिंग रिंग हॉल आदि में बिजली कनेक्शन नहीं होने से दिन के समय भी अंधेरा छाया रहता है। इस कारण खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान रोशनी का अभाव रहता है। इन खेलों का अभ्यास सुबह एवं शाम के समय किया जाता है, लेकिन बिजली के अभाव में उन्हें निराश होना पड़ता है। अंधेरे के कारण देर शाम और तड़के खेल मैदान पर एथलेटिक्स खिलाड़ी भी परेशान रहते हैं।
^बिजलीकनेक्शन कराने का प्रयास किया जा रहा है। स्वीकृति मिलते ही बिजली कनेक्शन के लिए विद्युत निगम में फाइल लगाई जाएगी।
-सत्यप्रकाश लुहाच, जिलाखेल अधिकारी
भरतपुर. लोहागढ़ स्टेडियम स्थित जिला प्रशिक्षण केंद्र भवन।
हाई मास्ट लाइट लगाने की मांग
लोहागढ़स्टेडियम में रोजाना खेलों का अभ्यास करने वाले खिलाड़ी हर्ष सेंगर, राम सिंह, नगेंद्र पाल सिंह, वर्षा कुमारी, लवली शर्मा, दीपक अग्रवाल, कोमल शर्मा आदि ने जिला प्रशासन से लोहागढ़ स्टेडियम में हाई मास्ट लाइट लगवाने और बिजली कनेक्शन कराए जाने की मांग की है।
खिलाड़ी हो रहे प्रभावित
लोहागढ़स्टेडियम में रोजाना करीब 500 खिलाड़ी खेलों का अभ्यास करने के लिए पहुंचते हैं। इनमें अधिकांश खिलाड़ी विद्यार्थी हैं, जो दिन के समय स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर आदि में पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं तथा सुबह या देर शाम को अभ्यास के लिए मैदान पर पहुंचते हैं। इनमें से करीब 50 खिलाड़ी बैड मिंटन, इतने ही कुश्ती और बॉक्सिंग के हैं। करीब 250 से 300 एथलीट खिलाड़ी ऐसे हैं जो तड़के 4 बजे लोहागढ़ स्टेडियम के ट्रैक पर दौड़ लगाने जाते हैं। शेष खिलाड़ी ऐसे हैं जो देर शाम मैदान पर क्रिकेट, फुटबॉल, या बॉलीवाल आदि खेलने पहुंचते हैं। शाम ढलते ही अंधकार के कारण उन्हें भी परेशानी होती है।
बिजली कनेक्शन नहीं होने से तड़के देर शाम अभ्यास करने वाले