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संस्कृत शोध संगोष्ठी में बताया पुराणों का महत्व
भरतपुर | एमएसजे कॉलेज में संस्कृत विभाग की ओर से पौराणिक साहित्य की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिकता एवं उपादेयता पर शोध विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई।
गोष्ठी का आरंभ प्राचार्य डॉ. उमेश चंद शर्मा ने किया। आयोजन सचिव डॉ. योगेंद्र भानु ने पुराणों का मानव जीवन में महत्व एवं उनमें प्रतिपादित सिद्धांतों पर विचार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। जेएलवीयू जोधपुर के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. श्रीकृष्ण शर्मा ने कहा कि पुराणों में वेदों का मर्म है। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. अनंतराम शर्मा ने कहा कि पुराण भारतीय ज्ञान विज्ञान के आधार हैं। वेदों में प्राप्त सूत्रों की सही व्याख्या पुराणों से ही प्राप्त होती है। दुर्भाग्य है कि हमने शास्त्रों को परखना बंद कर दिया है। पुराण, शास्त्र ज्ञान-विज्ञान से भरे हुए हैं। गुजरात विश्वविद्यालय के प्रो. कमलेश चौकसी ने वेद और पुराण के रुप को वन और उपवन के उदाहरण से स्पष्ट किया। प्रो. रमाकांत पांडे ने कहा कि पुराण वेद रुप हैं, इनकी प्रासंगिकता एवं उपादेयता सर्वथा सिद्ध है। राजस्थान संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. रेणुका राठौड़ ने कहा कि अकादमी का प्रयास है कि ज्ञान के विस्तार को संबल प्रदान किया जाए। संगोष्ठी में 30 पत्रों का वाचन किया गया। प्रो. सीएम कोली, नीलम गौड़, मेघा शर्मा,डॉ. अजय, छोटी बाई, जुहरा गुल भी मौजूद थे।
भरतपुर. एमएसजे कॉलेज में आयोजित संस्कृत शोध संगोष्ठी में बोलते वक्ता।