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परोपकार सबसे बड़ा पुण्य कार्य

7 वर्ष पहले
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किलास्थित श्री बिहारी जी मंदिर परिसर में श्रीमद भागवत कथा के दौरान शुक्रवार को ब्रज मोहिनी ने कहा कि संसार में परोपकार से बड़ा कोई पुण्य कार्य नहीं है और दूसरों को कष्ट पहुंचाना सबसे बड़ा पाप है।

उन्होंने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। चौरासी लाख योनियों में जीवन व्यतीत करने के बाद जीव को मनुष्य का जन्म मिलता है। मनुष्य जन्म के लिए देवता भी तरसते हैं। मोहिनी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को चाहिए कि वह मन, वचन, कर्म से सत्य धर्म का पालन करते हुए भगवान श्री कृष्ण को हर पल भजता रहे। ईश्वर की भक्ति करने से मानव जीवन सुख-शांति पूर्वक गुजरने के बाद मनुष्य जन्म-मरण के चक्कर से मुक्त होकर मोक्ष धाम को प्राप्त करता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

भरतपुर. बिहारीजी मंदिर में प्रवचन सुनते भक्तजन।