सोचती हूं कि जमाने से चुरा लू तुमको...
भरतपुर. श्रीहिन्दी साहित्य समिति की ओर से रविवार को समिति सभागार में हुए काव्य सांझ कार्यक्रम में कवियों ने प्रस्तुति देकर श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में रुबिया चौहान हाथरस ने सोचती हूं की जमाने से चुरा लूं तुमको, उम्र भर के लिए सांसों में बसा लूं तुमको... के अलावा कई कविताओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। अरविंद पोटा मुरैना ने जिन रंगों पर किया भरोसा वे सब कच्चे निकल गए थे, जिनके जज्बात हिमालय मोम सा बनकर पिघल गए... कविता सुनाई। रामबाबू सिकरवार बाड़ी ने जैसे घर गृहिणी बिन सूना, बिना प्राण ज्यों तब कुछ भी नहीं, ज्यों करनी बिन कथनी सुनी, सूनी अवध दिल राम, श्याम बिना सूनौ सी बृज धाम..., डॉ. राजेश खुशदिल फरीदाबाद ने निगाहों में बचपन समाया रहेगा, यौवन का जादू भी छाया रहेगा, जवानी की पहचान तब तक है जिंदा जब तक बुजुर्गों का साया रहेगा..., हरिओम हरि ने राष्ट्र मंच ऊपर ये बनी सूत्रधार आज, देश की अखंडता का तार बनी हिन्दी, भारतेन्दु, मैथिली निराला से सुमन खिले देश उपवन की बहार बनी हिन्दी... कविता सुनाई। जनाब नूर धौलपुरी ने है तेरा यदि लाल तो वह भी तो लाली है, हर खुशी है लाल की घर की उजाली है... कविता सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक प्रथम बृजेंद्रसिंह कौंतेय की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि यूआईटी के पूर्व चेयरमैन गुलराज गोपाल खंडेलवाल थे। संचालन हरिओम हरि ने किया। कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष मोहन बल्लभ शर्मा, निरंजन सिंह लवानिया एडवोकेट, संयोजक मा. रामबाबू शुक्ल आदि उपस्थित थे। आभार समिति मंत्री राजेन्द्र अग्रवाल ने जताया।
भरतपुर. हिन्दी साहित्य समिति में काव्य सांझ के तहत काव्य पाठ करती कवियत्री।