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श्रीराम का सीताजी लक्ष्मण सहित वन को प्रस्थान

7 वर्ष पहले
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रामलीलासमिति की ओर से किला स्थित श्री बिहारी जी मंदिर परिसर में गुरुवार को रामलीला महोत्सव के तहत कैकई का कोप भवन में जाना, दशरथ-कैकई संवाद एवं श्रीराम का सीताजी लक्ष्मण सहित वन को प्रस्थान का मंचन किया गया। रामलीला में श्री राम विवाह के बाद अपने घर लौट आते हैं। घर में बधाइयां गाई जाती हैं। महाराजा दशरथ अपने को वृद्ध समझकर श्री रामजी को युवराज बनाकर गद्दी पर बैठने को कहते हैं। लेकिन यह बात कैकई सुन लेती हैं और नाराज होकर कोप भवन में चली जाती हैं। बाद में राजा दशरथ उनके पास जाते हैं और उनसे नाराजगी का कारण पूछते हैं तो उन्होंने राजा दशरथ से दो वर मांगे, इसमें भरत को राजगद्दी देने एवं श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास देना शामिल था। राजा दशरथ दुखी हो जाते हैं। यह बात रामजी को पता चलता है तो वह गुरू वशिष्ठ, राजा दशरथ माता कौशल्या आदि से आज्ञा लेकर सीता लक्ष्मण सहित वनवास को प्रस्थान कर जाते हैं। रामलीला में राम का राहुल सिंह, लक्ष्मण का गोपाल दीक्षित, सीता का सागर पांचाल, कैकई का विक्रम शर्मा, दशरथ का करन शर्मा, गुरू वशिष्ठ का शिवा शर्मा एवं मंथरा का सचिन सोनी ने किरदार निभाया। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष मोहनलाल मधुकर, रामबाबू शुक्ल, कैलाशचंद गुप्ता, राधेश्याम गुप्ता, लक्ष्मी नारायण शर्मा, वैद्य निर्मल खंडेलवाल, गोविंद प्रसाद शर्मा, कमल किशोर शर्मा, मोहनलाल मित्तल, राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल, मोहन सिंह कुंतल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

भरतपुर. रामलीलामहोत्सव के तहत कोप भवन में बैठी कैकेई उपस्थित राजा दशरथ।