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बेटियों की आत्मरक्षा के लिए भामाशाह की तलाश
बेटियोंको आत्मरक्षा गुर सिखाना विभाग के लिए चुनौती बनकर रह गया है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बेटियों को मिलने वाले प्रशिक्षण के बजट में कटौती कर दी है। ऐसे में प्रशिक्षण शिविर कराने के लिए विभाग के अफसरों को पसीने छूट रहे हैं।
अब ये शिविर लगाने के लिए भामाशाहों की तलाश की जा रही है। इसके आदेश भी स्वयं विभाग ने ही दिए हैं। इस कारण अभी तक शिविर भी शुरू नहीं हो सके हैं। विभाग की ओर से शिविर आयोजन के लिए 10 हजार रुपए का बजट दिया जाता था। लेकिन इसे कम करते हुए तीन हजार रुपए प्रति शिविर कर दिया गया है।
इसमें ढाई हजार रुपए प्रशिक्षण मानदेय 500 रुपए शारीरिक शिक्षक के यात्रा भत्ता के रूप में देने के आदेश दिए हैं। लेकिन शिविर के दौरान होने वाले अन्य सभी खर्चों में भामाशाहों का सहयोग लेना है। विभाग ने बालिकाओं के पौष्टिक नाश्ते के लिए किसी भी तरह की राशि स्वीकृत नहीं की है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने पिछले साल छात्राओं को असामाजिक तत्वों से निपटने के गुर सिखाने की योजना बनाई।
निदेशालय ने की प्रशिक्षण के बजट में कटौती, तीन हजार रुपए में 10 दिन का प्रशिक्षण देना बना चुनौती
हालात
भामाशाहों का टोटा
रामसाके निर्देशों के मुताबिक शिविर में इन मदों पर भामाशाह सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से खर्च कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग शिविर के लिए भामाशाह तलाशने में जुट गया है। लेकिन विभाग को भामाशाह भी नहीं मिल रहे। ऐसे में अफसरों को शिविर लगाने में पसीने छूट रहे हैं। क्योंकि इतने बड़े शिविर में इन सभी कामों पर काफी खर्चा होता है। विभाग की परेशानी यहीं खत्म नहीं होती है। शिविर समापन पर प्रमाण पत्र पुरस्कार की भी व्यवस्था करनी होगी।
प्रशिक्षण में िसखाएं जाएंगे आत्मरक्षा के गुर
प्रशिक्षणमें बालिकाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाते हैं। पिछले साल ही राज्य सरकार की ओर से ऐसे प्रशिक्षण शिविर लगाने का निर्णय लिया गया था। प्रशिक्षित महिला शारीरिक शिक्षक बालिकाओं को जूडो-कराटे, जिम्नास्टिक आदि गतिविधियां सिखाएंगी। शिविर में नवनियुक्त इन विषयों की जानकार शारीरिक शिक्षकों को ही प्राथमिकता दी जाती है। 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर लगता है। जिले में करीब छह से अधिक शिविर लगने हैं। इनके लिए संस्था प्रधानों से प्रस्ताव लिए जाएंगे, जो कि फरवरी माह तक होंगे। फरवरी तक ही ये सभी शिविर ल