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संरक्षित कृषि पर मॉडल प्रशिक्षण का आयोजन
सरसोंअनुसंधान निदेशालय द्वारा ’टिकाऊ फसल उत्पादन के लिए संरक्षित कृषि का आधुनिक परिप्रेक्ष्य‘ पर आठ दिवसीय मॉडल प्रशिक्षण पाठयक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर निदेशक धीरज सिंह ने कहा कि सीमित संसाधनों के कारण खेती किसानों के लिए लगातार कम लाभदायक होती जा रही है। अधिकतम उपज तथा वर्तमान उपज में बहुत अंतर है। घटते संसाधन, उत्पादन, उपज एवं भूमि जोत को देखते हुए संरक्षित खेती एक सफल विकल्प हो सकता है। उन्होंने कहा कि संरक्षित खेती, संसाधन बचत द्वारा फसल उत्पादन की वह तकनीक है, जिसमें अधिक उत्पादन तथा टिकाऊ कृषि के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाती है। संरक्षित कृषि, किसानों का जीवन स्तर तथा आजीविका के बेहतर साधनों को बढ़ावा देती है।
इस अवसर पर अतिथि आर बीएस. कॉलेज, बिचपुरी के प्रसार विभागाध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीखे हुए ज्ञान को अपने क्षेत्र में किसानों में प्रसार करने पर ही प्रशिक्षण का उद्देश्य पूरा होगा। कृषि विभाग के उपनिदेशक देशराज सिंह ने सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उपनिदेशक योगेश शर्मा ने कहा कि जिस तरह देश को खाद्यान्नों में ही आत्मनिर्भरता प्राप्त हुई। वैसी ही आत्मनिर्भरता तिलहन एवं दलहन में प्राप्त करनी होगी। कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.अशोक शर्मा ने भी जानकारी दी। इस अवसर पर आसाम, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश राज्यों के 20 कृषि प्रसार अधिकारियों ने भाग लिया।
भरतपुर. सरसों फसल के बारे में जानकारी देते कृषि वैज्ञानिक।