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हथियारों का डाटा ऑनलाइन होगा, मिलेगा यूनिक नंबर

7 वर्ष पहले
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जिलेमें 2012 से अब तक जारी हुए देशभर के आर्म्स लाइसेंस का डाटा ऑनलाइन किया जा रहा है। गृह मंत्रालय ने सभी कलेक्टर्स को पत्र भेजकर डाटा ऑनलाइन करने के निर्देश दिए हैं। भरतपुर जिले में करीब 6750 आर्म्स लाइसेंस हैं। जिनका डाटा ऑनलाइन करने की कवायद शुरू की गई है। डाटा ऑनलाइन होने के बाद आर्म्स लाइसेंस को एक यूनिक नंबर दिया जाएगा। इसके आधार पर उस लाइसेंस की पहचान की जा सकेगी। यदि देश में कहीं पर भी उस हथियार के जरिए किसी भी तरह का अपराध किया गया तो इस यूनिक नंबर के जरिए यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि यह किसके नाम पर है।

इसके अलावा अलग-अलग राज्य में लाइसेंस भी नहीं लिया जा सकेगा। पहले जिन लोगों ने यह लाइसेंस ले रखे हैं, उनके लाइसेंस कैंसिल होंगे। आने वाले समय में लाइसेंस के लिए आवेदन भी ऑनलाइन होने लगेंगे।

अपराधों की रोकथाम में मिलेगी मदद

हथियारोंका डाटाबेस तैयार होने से अपराधों की रोकथाम में भी मदद मिलेगी। अनेक बार यह सामने आया है कि आपराधिक किस्म के लोग अपराध के दौरान दूसरे के आर्म्स इस्तेमाल करते हैं। मौके से अथवा बाद में बदमाशों की निशानदेही पर बरामदगी होने से ऐसे लोग भी सामने जाएंगे जो अपने हथियारों का दुरुपयोग करते हैं। इससे लोग अपने हथियारों को गलत हाथों में इस्तेमाल होने से रोकेंगे। इसके अलावा लाइसेंसी हथियार की आड़ में अवैध हथियार रखने पर भी अंकुश लगेगा, क्योंकि अब हर हथियार पर वैध यूनिक नंबर होगा। बिना यूनिक नंबर का हथियार अवैध माना जाएगा।

पुराने लाइसेंस ने बढ़ाई समस्याएं

ऑनलाइनप्रक्रिया ने प्रशासन के सामने परेशानी भी बढ़ा दी है। क्योंकि पुराने लाइसेंस का डाटा ऑनलाइन के लिए डेट ऑफ बर्थ भी जरूरी की गई है, लेकिन पुराने लाइसेंस में डेट ऑफ बर्थ नहीं है। अब कर्मचारी फोन करके जानकारी जुटा रहे हैं। गृह मंत्रालय ने साफ कहा है कि जिन लाइसेंस में डेट ऑफ बर्थ नहीं है, उन्हें कैंसिल कर दिया जाए। इस संबंध में प्रशासन की ओर से सभी थानों को भी सूचना भेज दी गई है। इसमें उम्र का खास ध्यान रखा जाएगा। सब कुछ ठीक रहा तो यह काम अगस्त 2015 तक पूरा करना प्रस्तावित है।