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गुमनाम शिकायतों पर पंचायतीराज नहीं करेगा कार्रवाई
भरतपुर. पंचायतीराजविभाग की ओर से गुमनाम शिकायतों पर अब कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, क्योंकि विभाग झूठी शिकायतों से परेशान है। विभाग में परिवादों के परीक्षण एवं जांच रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। ऐसे में विभाग ने यह निर्णय लिया है।
विभाग के अतिरिक्त आयुक्त की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। पंचायतीराज विभाग में अब गुमनाम और अहस्ताक्षरित शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। शिकायतकर्ता को शपथ पत्र के जरिए अपनी पहचान भी बतानी होगी। ग्रामीण विकास विकास एवं पंचायतीराज विभाग के अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र शेखर मक्कड़ ने इस संबंध में एक परिपत्र जारी किया है। प्रत्येक परिवाद के साथ परिवादी के सत्य होने आवेदक के परिचय से संबंधित एक शपथ पत्र पेश करना होगा। वर्तमान सरपंच, पंचायतीराज संस्थान के सदस्य, विधायक एवं सांसद के लिए शपथ पत्र अनिवार्य नहीं है। विभाग में किसी भी स्तर पर शिकायत होने पर सबसे पहले शिकायतकर्ता की पहचान की जाएगी। उसके बाद ही उस पर जांच होगी। अहस्ताक्षरित, गुमनाम, झूठी पहचान वाले शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत की गई शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
पहले भी ऐसे आदेश दिए थे। फिर से इन्हें प्रभावी बनाने को कहा गया है। कई बार झूठी शिकायतों के कारण विभाग को परेशानी उठानी पड़ती है।
-केसीमीणा, सीईओजिला परिषद
विभाग ने इसलिए लिया निर्णय
कोईभी व्यक्ति किसी भी बड़े पद पर आसीन जनप्रतिनिधि अफसर की झूठी शिकायत कर देता है तो उसकी जांच की जाती है। ऐसे में झूठी शिकायत के कारण वैमनस्यता फैलती है और काम बाधित हो जाते है। पंचायतीराज विभाग में छोटी सी शिकायत से भी ऐसा हो जाता है। विभाग के अधिकारी बताते हैं कि बहुत से प्रकरणों में केवल व्यक्तिगत रंजिश एवं दुर्भावनावश परिवाद दर्ज करवाए जाते हैं। झूठे नाम और गलत पता देकर परिवाद भेज दिए जाते हैं, इससे शिकायतकर्ता का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। डाक के जरिए शिकायत भेजी जाती है और इसके पक्ष में कोई प्रमाण भी उपलब्ध नहीं करवाए जाते।
वरना दर्ज होगी एफआईआर
अगरकोई भी व्यक्ति झूठी शिकायत करता है। यदि किसी प्रकरण में यह साबित हो गया कि कोई शरारती तत्व झूठे नाम एवं पहचान से शिकायत कर रहा है तो उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को दिए गए हैं। साथ ही यदि किसी व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत