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एफडीआई से निजी हाथों में जाएगी रेलवे

7 वर्ष पहले
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भरतपुर. सरकारने सौ प्रतिशत एफडीआई रेलवे में कर दी गई है, इससे रेलवे पर विदेशी कंपनी का अधिकार हो जाएगा। पहले रेलवे में एफडीआई 49 प्रतिशत थी, नीति निर्धारण का अधिकार रेलवे का था, लेकिन अब सभी अधिकार विदेश कंपनी के पास चले जाएगे।

ये विचार वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष चंदशेखर शर्मा ने रेलवे कर्मचारियों की बैठक में व्यक्त किए। शर्मा ने कहा कि रेलवे में 13 लाख 26 हजार कर्मचारी 1 लाख 25 हजार किलोमीटर का ट्रैक है। सरकार ने उच्च गति की रेलगाड़ी, डेडिकेटेड फ्रेट लाइनें , ट्रेन सेट्स,रोलिंग स्टॉक, लोकोमोटिव, कोच निर्माण, रेल विद्युतीकरण, सिग्नलिंग सिस्टम, फ्रेट टर्मिनल्स, पैसेंजर टर्मिनल, मास रेपिड यातायात प्रणाली आदि में 100 प्रतिशत एफडीआई कर दी है। इससे आमदनी का 60 प्रतिशत हिस्सा कंपनी के पास चला जाएगा तथा शेष 40 प्रतिशत में से कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, 10 लाख पेंशनर्स की पेंशन तथा स्टेशन रख रखाव, जन सुविधाएं पर खर्च करना होगा, अत: कर्मचारियों के वेतन समय पर मिलना संभव नही होगा। इस मौके पर कर्मचारियों को शाखा सचिव करतार सिंह, अश्विन कुमार, एलएल लवानिया, शाखा अध्यक्ष पीके शर्मा, दामोदर सिंह, प्रताप सिंह सुभाष अग्रवाल आदि ने भी संबोधित किया।

यात्रियों पर क्या होगा प्रभाव

रेलवेकी आमदनी का 60 प्रतिशत हिस्सा एफडीआई के पास चले जाने के कारण कर्मचारियों के वेतन भत्तों से भार बढ़ेगा। इससे सरकार पर व्यय बढऩे से इन्हें निकालना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में यात्री किराया बढ़ाना पड़ेगा।

कॉरिडोर बिछाया जाएगा

एफडीआईके तहत फ्रेंड कॉरिडोर के नाम से अतिरिक्त लाइन डाली जाएगी। जो चारों दिशाओं में मात्र 20 हजार ट्रैक किलोमीटर होगी। इस लाइन पर तालगडिय़ा, कंटेनर, द्रुतगति से चलने वाली गाडिय़ां चलेगी। जो रेलवे की आमदनी का 60 प्रतिशत भाग होगी। एफडीआई के अधीन रेलवे के वर्कशॉप, मास यातायात नियंत्रित करने के विकल्प, टीआरएस अन्य शेड्स भी एफडीआई के अधीन होगे।

वाणिज्यविभाग हो जाएगा समाप्त

एफडीआईसे वाणिज्य विभाग समाप्त कर दिया जाएगा। बुकिंग, रिजर्वेशन, सफाई आदि कार्य ठेके पर चले जाएगे। वेस्टन सेंट्रल रेलवे ने वाणिज्य कर्मचारियों से अन्य विभाग में जाने के ऑप्शन मांगे है। जिसका यूनियन ने विरोध किया है, जिसके चलते सरकार ने कार्यक्रम स्थगित कर दिया है।

भरतपुर. कर्मच