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मनरेगा से निखरेगी स्कूल खेल मैदानों की सूरत

7 वर्ष पहले
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सरकारी स्कूलों में खेल मैदानों की सूरत जल्द सुधरेगी, क्योंकि राज्य सरकार की ओर से मनरेगा योजना के माध्यम से सरकारी स्कूलों में खेल मैदान विकसित किए जाएंगे। इसके लिए बजट भी आवश्यकता के अनुसार दिया जाएगा। इससे जिले के सैंकड़ों स्कूलों में खेल मैदान की जमीनों को अतिक्रमण मुक्त भी कराया जा सकेगा।

इसके लिए शिक्षा विभाग को जहां खेल मैदान बनाने हैं, उन कामों को वार्षिक कार्य योजना में शामिल कर नरेगा शाखा को प्रस्ताव भेजने होंगे। नरेगा के तहत इन सरकारी स्कूलों के खेल मैदान में भूमि के समतलीकरण से लेकर चारदीवारी तक का काम हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि अकेले माध्यमिक शिक्षा में करीब 150 ऐसे सैकंडरी, सीनियर सैकंडरी स्कूल हैं जहां खेल मैदान ही नहीं हैं। प्रारंभिक शिक्षा के राजकीय स्कूलों में अधिकतर के पास जमीन की कमी है। नरेगा से खेल मैदान तैयार करने की योजना अगस्त के प्रथम सप्ताह में जारी हुई थी। नरेगा कमिश्नर ने इस संबंध में प्रदेश की सभी जिला परिषदों के सीईओ को आदेशित करते हुए कार्य कराने के लिए कहा था।

इसके बाद विकास अधिकारियों को भी इस संबंध में पत्र भेजकर शिक्षा विभाग से जानकारी जुटाकर प्रस्ताव भिजवाने के लिए कहा गया। लेकिन अभी तक स्कूलों से प्रस्ताव भी नहीं मिल सके हैं। खेल मैदान जमीन समतलीकरण, चारदीवारी के अलावा बैडमिंटन-टेनिस कोर्ट, ट्रैक आदि निर्माण की भी योजना है। यदि शिक्षा विभाग खेल मैदान निर्माण के लिए गंभीरता बरते तो विद्यार्थियों को भी खेलों में अागे किया जा सकता है।

सरकार का मकसद यह

सरकारआपके द्वार कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री के उदयपुर संभाग में दौरे के दौरान सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया था। इसके बाद शासन सचिव शिक्षा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भी शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों में खेल मैदान तैयार कर बच्चों की प्रतिभा निखारने के आदेश दिए।

जुरहरा. कस्बे में स्थित बाबूनाथ स्वामी राउमावि का बदहाल खेल मैदान।

25 प्रतिशत मैदानों में अतिक्रमण

ज्यादाप्रस्ताव नहीं आने के पीछे सबसे बड़ा कारण है सरकारी स्कूलों के खेल मैदानों पर अतिक्रमण की समस्या। अतिक्रमण के हालात ऐसे हैं कि अधिकतर संस्था प्रधानों को ही नहीं पता कि स्कूल के लिए आवंटित जमीन पर अब कौन काबिज है। पिछले तीन साल में स्कूलों पर अतिक्रमण की दर्जनों शिकायत भी जिला प्रशासन को मिली हैं।