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रजिस्ट्रेशन के अभाव में सोनोग्राफी मशीन बंद

7 वर्ष पहले
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बहुउद्देशीयपशु चिकित्सालय में करीब 10 महीने पूर्व पांच लाख रुपए लागत से लगाई गई सोनोग्राफी मशीन उपयोग में नहीं लिए जाने के कारण व्यर्थ साबित हो रही है। जिले में पहली बार लगाई सोनोग्राफी मशीन का उपयोग नहीं हो पाने का कारण भी आर्थिक तंगी रहा है।

जिले के बहुद्देशीय पशु चिकित्सालय में गत मार्च में प्रथम बार पशुओं की जांच के लिए सोनोग्राफी लगाई गई। सोनोग्राफी का जुलाई में उपयोग किया गया तथा करीब 25 पशुओं की सोनोग्राफी जांच की गई। बाद में विभाग को सोनोग्राफी के रजिस्ट्रेशन की याद आई और उच्च अधिकारियों ने पत्र भेजकर सोनोग्राफी मशीन का उपयोग रजिस्ट्रेशन पूर्व नहीं कराने के निर्देश दिए। यही विभागीय आदेश सोनोग्राफी जांच में अब तक आड़े रहे हैं। इस कारण विशेष बीमार पशुओं को लोग इलाज के लिए मथुरा आगरा ले जाने को मजबूर हो रहे हैं।

किसान हो रहे परेशान

पशुपालकइकरन के मोहर सिंह ने बताया कि भैंस को 70 हजार रुपए में खरीदा था। भैंस बीमार होने पर चिकित्सालय लाया लेकिन जांच मशीन बंद होने के कारण अब भैंस को पास ही मथुरा के पशु चिकित्सालय ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसी प्रकार गांव डहरा के पशुपालक राजवीर सिंह ने बताया कि जिले के पशुपालन विभाग में पशुओं की जांच के लिए मशीन ही उपलब्ध नहीं है तो उपचार क्या होगा। मेरे पशु की सोनोग्राफी नहीं हुई है।

क्या कहते हैं अधिकारी

बहुउद्देशीयचिकित्सालय के उपनिदेशक डॉ. नगेश चौधरी ने बताया कि सोनोग्राफी की एसेसरीज मार्च 2014 में विभाग को प्राप्त हुई, मशीन जुलाई से अपना कार्य प्रारंभ किया, इससे 25 पशुओं की सोनोग्राफी भी की गई। लेकिन सरकार द्वारा मशीन के रजिट्रेस्शन नहीं होने के कारण उक्त मशीन को कार्यालय में रखवा दिया गया है। उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रेशन में खर्चा लगभग 35 हजार रुपए रहा है। इसके लिए राज्य सरकार को लिखा गया है। रजिस्ट्रेशन होने के बाद ही सोनोग्राफी मशीन का कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।

35 हजार के लिए पांच लाख की मशीन का उपयोग बंद

पशुओंकी सोनोग्राफी के लिए आई मशीन के रजिस्ट्रेशन का खर्चा मात्र 35 हजार रुपए है। पशुपालन विभाग की ओर से सोनोग्राफी मशीन का उपयोग रजिस्ट्रेशन पूर्व नहीं करने के आदेश तो जारी कर दिए गए, लेकिन मशीन के रजिस्ट्रेशन का खर्च वहन करने के बारे में कुछ नहीं कहा। स्थानीय स्तर पर 35 हजार रुपए की व्यवस्था न