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भागवत कथा में बताया अच्छे-बुरे कर्मों का महत्व

7 वर्ष पहले
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किलास्थित श्री बिहारी जी मंदिर परिसर में श्रीमद भागवत कथा के अंतर्गत कथावाचक मां ब्रज मोहिनी ने कहा कि सुख-दुख के प्रदाता ईश्वर नहीं अपितु हमारे पूर्व संचित या वर्तमान के अच्छे या बुरे कर्म हैं। हमें जान बूझकर किए कार्यों की भांति ही अनजाने में हुए कर्मों के फल भोगने को बाध्य होना पड़ता है।

मोहिनी ने कहा कि अग्नि का स्पर्श हमें जलाता है। अनजाने में भी किया गया विषपान मृत्युकारक होता है। अनजाने में भी सुगंध या दुर्गंध पूर्ण स्थान से गुजरने पर सुगंध या दुर्गंध का एहसास होता है। उन्होंने कहा कि कर्म के अभियान से रहित होकर कर्म करो तो तुम अच्छे बुरे, पाप पुण्य से मुक्त हो जाओगे। मात्र कर्म करते हुए भी हम जीवन में वांछित शाश्वत, सुख आनंद प्राप्त नहीं कर सकते हैं। परमात्मा का स्मरण हृदय से करते हुए कर्म करें। संतों, शास्त्रों, महापुरुषों अवतारों को मात्र अपनी कमियां छुपाने की ढाल ही नहीं बनाए, उनकी प्रेरणा उपदेश भी ग्रहण कर जीवन में उतारें। इस अवसर बड़ी संख्या में श्रद्घालु मौजूद थे।

भरतपुर . किला स्थित बिहारीजी मंदिर परिसर में प्रवचन देती ब्रज मोहिनी।