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ब्लड नहीं मिला,1 साल में 30 प्रसूताओं की मौत
जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक में भी ब्लड स्टोरेज की सुविधा नहीं होने से 30 प्रसूताओं को जान से हाथ धोना पड़ा, अकेले जिला अस्पताल में 2013 में 17 प्रसूता 707 नवजात बच्चों 2014 में अगस्त माह तक 14 प्रसूता 453 नवजात ने दम तोड़ दिया
भास्कर न्यूज| झालावाड़
जिलेके स्वास्थ्य केंद्रों में पिछले एक साल में 30 प्रसूताओं की जान जा चुकी है। जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में से एक में भी ब्लड स्टोरेज की सुविधा नहीं होना इन प्रसूताओं की मौत का कारण बना। इसके अलावा इनमें से कुछ प्रसूताओं की मौत समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने से भी हुई। यही नहीं कई अस्पताल तो अप्रशिक्षित कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं। जिनके कारण जिले में पिछले एक साल में 966 बच्चों की मौत हो गई। इनमें से अधिकांश बच्चों को अगर री-ससीटेशन (बच्चों के मुंह में जाने वाले पानी को साफ करने की सुविधा) मिल जाती तो कई की जान बचाई जा सकती थी, लेकिन कई एएनएम एलएचवी को इसका प्रशिक्षण ही नहीं दिया गया। यह कमियां स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने खुद मानी हैं। इसके अलावा कई अस्पताल के लेबर रूम तो प्रसूताओं को खुशी के साथ संक्रमण भी दे रहे है। पिड़ावा सहित कई अस्पतालों के लेबर रूम में पानी भरा हुआ है तो कई में गंदगी पड़ी हुई है। इसके अलावा जिले के 12 अस्पतालों में जटिल प्रसव की सुविधा नहीं है।
18पीएचसी में डॉक्टर नहीं
जिलेमें 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, लेकिन इनमें 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो ऐसे है जहां डॉक्टर ही नहीं हैं। प्रसव पीड़ा होने पर प्रसूताएं आती हैं उनको एएनएम संभालती है, लेकिन कई बार उनके बस में भी नहीं रहता है और जब तक सीएचसी या जिला अस्पताल पहुंचते हैं तब तक बहुत देर हो जाती है।
जिलेमें केवल 2 महिला डॉक्टर
जिलेके 14 सीएचसी 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं, लेकिन मात्र दो अस्पताल अकलेरा मनोहरथाना में ही महिला डॉक्टर हैं। महिला डॉक्टर की मांग को लेकर कई बार लोगों ने धरना-प्रदर्शन ज्ञापन दिए, लेकिन महिला डॉक्टर की नियुक्ति नहीं हुई। ऐसे में ग्रामीण अस्पतालों में आधे प्रसव भी नहीं हो रहे हैं। बड़ी संख्या में प्रसूताएं जिला अस्पताल पहुंच रही हैं। इससे यहां की व्यवस्थाएं चरमरा जाती हैं।
80हजार में भी नहीं आए डॉक्टर
जिलाअस्पताल के लिए महिला डॉक्टर सहित अन्य डॉक्टरों