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विनय, विवेक से कठिन मंजिल भी मिल जाती है: मुनि यशोरत्न

7 वर्ष पहले
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भीम| आचार्ययशोर| सुरिक्षण ने कहा है कि इंसान में विनय, विवेक हो तो कठिन काम भी आसान हो सकता है। ऐसे मनुष्य का जीवन स्वर्ग बन जाता है। इस युग में विनय एवं विवेक की हर मनुष्य को अति आवश्यकता है। आज के वातावरण में प्रत्येक मनुष्य अपनी-अपनी दिनचर्या की पूर्ति हेतु अपने परिवार के लिये दौड़ रहा है। लेकिन विनय विवेक को भूल जाता है। वे कस्बे के राजकीय आदर्श उच्च प्राथमिक स्कूल में धर्म सभा में छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। आचार्य ने कहा कि बच्चों को ज्ञानी बनाना है तो माता-पिता के साथ साथ विद्यालय के अध्यापकों का सहयोग भी अति आवश्यक है। लेकिन बच्चों को वही संस्कार बना सकते हैं जिस बच्चे में अहंकार नहीं होता है। युवाओं को आगे बढ़ने के लिये विनय एवं विवेक की अति आवश्यकता है। विद्या विनय से ही सुसज्जित होती है। जिस मनुष्य एवं युवा को अच्छा एवं बुरा का ज्ञान हो जाता है उस मनुष्य को विवेकशील व्यक्ति कहा जाता है। आचार्य ने टीवी, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा से दूर रहने का संकल्प दिलाया। मुनि संकित र| विजय ने भी संबोधित किया। धर्म सभा में गन्ना परिवार की ओर से शॉल एवं माला पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान समाजसेवी भैरुलाल दक, सुरेश मेहता, प्रधानाध्यापक डाऊसिंह, पवन गन्ना, तेजमल गन्ना, नवीन गन्ना, गोपालसिंह पीटीआई उपस्थित थे।

भीम। राजकीय आदर्श उच्च प्राथमिक स्क्ूल में धर्मसभा में प्रवचन देते मुनि।