जालोर को अब चाहिए ट्रांसपोर्ट नगर
शहरकी ग्रेनाइट इंडस्ट्रीज तथा अन्य व्यवसायों के लिए माल की लोडिंग और अनलोडिंग को लेकर बढ़ रहे ट्रांसपोर्ट से शहर के आसपास का पांच किलोमीटर तक का एरिया हर दम जाम में ही फंसा रहता है। अलग से ट्रांसपोर्ट नगर नहीं होने के कारण संबंधित दुकानों पर माल खाली कराने के लिए भारी वाहन शहर के अंदरुनी क्षेत्र में ही आते है जिससे यातायात अवरूद्ध हो जाता है। शहरी क्षेत्र और मुख्य मार्गों पर यातायात दबाव को नियंत्रित करने के लिए जालोर में ट्रांसपोर्ट नगर बनना जरूरी हो गया है। इससे केवल ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों, उद्यमियों, थोक और खुदरा व्यापारियों को राहत मिलेगी बल्कि शहरवासियों को भी ट्रेफिक जाम से मुक्ति मिलेगी और हादसों का खतरा भी नहीं रहेगा।
हरदमभारी वाहनों की आवाजाही से दुर्घटना का अंदेशा
शहरमें कुल 55 रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्ट व्यवसायी हैं, जिनके जरिए जालोर के विभिन्न व्यवसायियों को माल की लोडिंग अनलोडिंग की जाती है। इनमें से करीब 10 ट्रांसपोर्टर्स आबादी क्षेत्र शास्त्री नगर कॉलोनी, सिरेमंदिर रोड, हनुमानशाला स्कूल के पास और पैट्रोल पंप के पास आई हुई है और शेष औद्योगिक क्षेत्र प्रथम, द्वितीय, तृतीय चरण भागली में सड़क किनारे और मोड़ पर स्थित है। ग्रेनाइट ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन मर्चेंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि ग्रेनाइट अन्य माल के परिवहन के लिए लोकल स्तर पर जिले सहित पाली, बाड़मेर, सिरोही, जैसलमेर, उदयपुर, राजसमन्द गुजरात के अलावा विभिन्न इलाकों से रोजाना 450 से 500 भारी वाहन शहर के औद्योगिक शहरी क्षेत्रों में आते हैं। जबकि अकेले ग्रेनाइट व्यवसाय के लिए शहर से रोजाना 80 से 100 भारी वाहन देश भर के अन्य राज्यों के लिए लोड होते हैं। इन सभी वाहनों को खड़ा करने के लिए शहर में कहीं भी उपयुक्त जगह नहीं है।
कहां जाता और कहां से आता है माल
राजस्थान,अहमदाबाद, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोधरा, दिल्ली, गुडग़ांव, नोएडा, मुंबई, पूना, नागपुर, कोलकाता, लखनऊ, आगरा, चंडीगढ़, भोपाल, रायपुर, इंदौर, रांची, विशाखापट्टनम, बैंगलूरू, हैदराबाद, चैन्नई, कोयंबटूर केरला सहित विभिन्न जगहों से जालोर में और जालोर से इन जगहों पर ग्रेनाइट के अलावा, किराणा, कॉस्मेटिक, इलेक्टोनिक्स आइटम, टेक्सटाइल, मणिहारी, मशीनरी पार्ट्स, ऑटो पार्ट्स रेडीमेड गारमेंट्स की लोडिंग और अनलोडिंग का काम होता है।
यह आती है समस