पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • इधर, भीनमाल के सरकारी अस्पताल में पसरी अव्यवस्था

इधर, भीनमाल के सरकारी अस्पताल में पसरी अव्यवस्था

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
...तो कैसे हो मरीजों का इलाज

क्षेत्रके सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव को लेकर भले ही अधिकारियों की ओर से दावे किए जा रहे हैं लेकिन हकीकत इससे काफी परे हैं। आज भी शहरी ग्रामीण क्षेत्र की अधिकतर प्रसूूताएं सरकारी अस्पताल के बजाय निजी अस्पतालों में प्रसव कराना मुनासिब समझती है। कुछ ऐसा ही हाल नगर के राजकीय अस्पताल का है जहां लेबर रूम सहित अन्य वार्डों में गंदगी के कारण संक्रमण फैलने के डर से मरीजों का ठहरना मुश्किल हो गया है।

राजकीय अस्पताल में प्रसव तो दूर साधारण बीमारी के इलाज के लिए भी लाेग भर्ती होना पसंद नहीं करते। यहां मात्र वे लोग भर्ती हो रहे है जो आर्थिक रूप से कमजोर है। शनिवार को भास्कर की ओर से राजकीय अस्पताल का हाल जानने पर शौचालय गंदगी से अटे पड़े थे। वहीं, महिला वार्ड में जगह-जगह कचरे के अलावा कई बिस्तर पर चद्दरें भी नहीं थी। जिन बिस्तरों पर चद्दरें थी, वे भी गंदगी से सडांध मार रही थी। जिस पर विश्राम तो क्या, वहां बैठना यानि बीमारी को आमंत्रण देना था।

यही हाल लेबर रुम का बना हुआ है। जहां सफाई के अभाव में लेबर टेबल पर गंदगी पसरी हुई थी। अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती मरीजों ने बताया कि शौचालय में भी पिछले दो दिनों से पानी का अभाव है। ऐसी स्थिति में उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सफाई के अभाव सडांध मारती चद्दरों की वजह से वार्ड में बैठना भी मुश्किल बना हुआ है।

शेष|पेज12

फीटोगार्ड दो माह से खराब : लेबररुम में जन्म से पूर्व बच्चे की स्थिति को जानने के लिए उपयोग में लिया जाने वाला फीटो गार्ड पिछले दो महीने से खराब पड़ा है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकों को अंदाज से ही कार्य करना पड़ता है। चिकित्सा प्रभारी डा. एमएम जांगिड़ ने बताया कि ईडीएएन कंपनी का फीटो गार्ड चार माह पूर्व मिला था, जो करीब दो माह से खराब पड़ा है। इस संबंध में संबंधित कंपनी विभागीय अधिकारियों को भी अवगत करवाया जा चुका है। जन्म के बाद कमजोर शिशु की सुरक्षा के लिए लगाई गई चार वार्मर मशीन में से एक मशीन लंबे समय से खराब पड़ी है।

सफाई के नाम पर हर माह 25 हजार व्यय

जानकारीके अनुसार अस्पताल को साफ सुथरा बनाए रखने के लिए सफाई का ठेका एक निजी ठेकेदार को दे रखा है। जिसके बदले उसे प्रतिमाह 25 हजार रुपए का भुगतान किया जाता है। इसके अलावा तीन अस्पताल के सफाईकर्मी भी का