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बुद्धिमान व्यक्ति कार्य से पहले परिणाम पर विचार करता है : जैनमुनि
स्थानीयमहावीर स्वामी मंदिर में आयोजित सैंतालीस दिवसीय उपधान तप के उन्नतीसवें दिन बुधवार को जैनमुनि जयर| विजय महाराज की सानिध्यता में प्रवचन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर जैनमुनि जयर| विजय मसा ने दीर्घदर्शिता पर प्रकाश ड़ालते हुए कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति किसी भी कार्य को एक दम नहीं करेगा, परंतु उस कार्य के आरंभ के पूर्व उसके परिणाम का भी अवश्य विचार करेगा। उन्होंने कहा कि सोचने के बाद ऐसा लगे कि यह कार्य करने के बाद लाभ होने वाला है। तभी वह काम प्रारंभ करेगा। परंतु कार्य का परिणाम हानिकर हो तो वह ऐसा कार्य नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि दीर्घ दर्शिता मानव का लक्षण है। भूखे व्यक्ति के सामने विषमिश्रित मिष्ठान थाल तथा रुखा-सुखा भोजन पड़ा हो, तो क्षणिक स्वाद को छोड़कर उसके भयंकर परिणाम को सोचकर मिष्ठान थाल का परित्याग कर दीर्घ दृष्टि वाला मानव रुखा-सुखा भोजन ग्रहण करता है। ऐसी अवस्था में दीर्घ दृष्टि से रहित नन्हा बालक मिष्ठान में ही हाथ ड़ालेगा। क्योंकि वह परिणाम का विचार नहीं करता है। आत्म साधना के मार्ग में दीर्घ दर्शिता अनिवार्य है। दीर्घ दृष्टि के अभाव में भारी अनर्थ की संभावना रहती है। तप, त्याग तथा विहार आदि में शारीरिक बल की आवश्यकता रहती है। शारीरिक बल के अभाव में तप आदि लाभ के बदले नुकसान में भी कारण बन जाते है। अत: आध्यात्मिक साधना में भी अपनी शारीरिक-मानसिक आदि शक्तियों का अतिक्रमण कभी नहीं करना चाहिए। पेट भरा हुआ और हम जबरन खावें तो अजीर्ण आदि रोगों के कारण नुकसान ही होता है। दोपहर में नमुत्थुणं सूत्र की वांचना प्रदान की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद थे।
भीनमाल. प्रवचनदेते जैनमुनि।
भीनमाल. स्थानीय महावीर स्वामी मंदिर में उपस्थित जैन समाज के लोग।