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\"मोक्ष की प्राप्ति एक मात्र मानव भव में ही संभव है\'

7 वर्ष पहले
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महावीरस्वामी मंदिर में आयोजित सैंतालीस दिवसीय उपधान तप के अठाइसवें दिन मंगलवार को जैनमुनि जयर| विजय महाराज की सानिध्य में प्रवचन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर जैनमुनि जयर| विजय महाराज ने कहा कि मोक्ष मार्ग की संपूर्ण साधना एक मात्र मानव भव में ही संभव है, इसी कारण मानव भव की सबसे अधिक महत्ता है। उन्होंने कहा कि देव लोक की भौतिक सुख समृद्धि के आगे मानव को प्राप्त भौतिक समृद्धि नाम मात्र की भी नहीं है। एक बार देवलोक की दिव्यता देखने वाला मानव इस चोले की गंदगी उस के तुच्छ सुखों की ओर नजर भी नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि अनंत ज्ञानी महापुरुषों ने कहा है कि मोक्ष की प्राप्ति एक मात्र मानव भव में ही संभव है, मानव भव में भी मोक्ष मार्ग की आराधना साधना के लिए पांच इंद्रियां व्यवस्थित चाहिए। इंद्रियों की हानि है, तो संयम का पालन अच्छी तरह नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा कि जो कान से बहरा है, वह जिनवाणी का श्रवण कैसे कर पाएगा। मोक्ष मार्ग की साधना के लिए पांचों इंद्रियों का परिपूर्ण होना आवश्यक है। पांच इंद्रियों की प्राप्ति मात्र से मोक्ष नहीं मिल जाता। तलवार प्राप्ति से कोई सुरक्षित नहीं हो सकता। उस का बराबर उपयोग करना भी आना चाहिए। अन्यथा वही तलवार उसके लिए मौत का कारण बन जाएगी। इसी प्रकार दुर्लभतम मानव भव में परिपूर्ण पांच इंद्रियां मिल गई। इतने मात्र से नहीं चलेगा। उन इंद्रियों के उपयोग की कला भी होनी चाहिए। यदि यह कला इंसान के पास हो तो इंद्रियां भयंकर से भयंकर विनाश कर सकती है। जैनमुनि आनंद विजय मसा ने सेवा धर्म की महत्ता पर प्रकाश ड़ाला। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद थे।

भीनमाल. स्थानीयमहावीर स्वामी मंदिर में प्रवचन देते जैनमुनि और मौजूद लोग।