पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • कठोर प्रकृति का व्यक्ति किसी का प्रिय नहीं बनता: जैनमुनि

कठोर प्रकृति का व्यक्ति किसी का प्रिय नहीं बनता: जैनमुनि

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
महावीरस्वामी मंदिर में आयोजित सैंतालीस दिवसीय उपधान तप के तहत रविवार को जैनमुनि जयर| विजय महाराज की सानिध्य में प्रवचन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर जैनमुनि जयर| विजय महाराज ने सौम्य कठोर भावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जो व्यक्ति प्रकृति आकृति से कठोर क्रूर होते है, वे सभी के अप्रिय बनते है। उनके संपर्क में आने से लोग घबराते है। इसी कारण कठोर व्यक्ति किसी का प्रिय पात्र नहीं बनता। उन्होंने कहा कि कठोर प्रकृति वाले व्यक्ति की बात सत्य होने पर पर भी लोकग्राही नहीं बन पाती। वही बात शांत स्वभाव वाला व्यक्ति कहे तो लोग उसे ग्रहण कर लेते है। उन्होंने कहा कि जो लोग स्वभाव में अत्यंत उग्र कठोर होते है, उनकी बात सुनने की भी इच्छा नहीं होती है। कठोर स्वभाव के व्यक्ति की बात कान में सुई की तरह चुभती है। वहीं, शांत प्रकृति में वह गुण होता है, जिससे अन्य व्यक्ति चुंबक की भांति खींचा चला आता है। उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों की वाणी में मिठास होती है, उसे सुनने पर श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते है। उन्होंने बताया कि आकृति और प्रकृति में घनिष्ट संबंध है। मनुष्य की आकृति से उसके गुण दोषों का पता चल जाता है। मनुष्य जितना प्रकृति से सौम्य और शांत होगा, उतनी ही उसकी आकृति भी सौम्य होगी। कठोर प्रकृति के व्यक्ति की मुखोकृति भी भयानक होगी। जैनमुनि ने कहा कि वाणी की कठोरता अनेक झगड़े करवाती है, जबकि वाणी की मृदुता झगड़ों को भी शांत करवा देती है। जैनमुनि आनंद विजय महाराज ने आत्मा एवं कर्म की संलिप्तता को दूर करने के लिए कहा कि जिस प्रकार सोने की शुद्धि अग्नि से संभव है, वैसे ही कर्म को आत्मा से अलग करने के लिए तप जरुरी है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद थे।

भीनमाल. महावीरस्वामी मंदिर में प्रवचन देते जैनमुनि।

भीनमाल. महावीरस्वामी मंदिर में प्रवचन सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।