समरजीतसिंह के जिलाध्यक्ष बनने से ऊमसिंह राठौड़ का ग्राफ गिरा
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में ऊमसिंह को टिकट देने से बढा टकराव, डॉ. समरजीत सिंह तीसरी बार बनें जिलाध्यक्ष
भास्करन्यूज | जालोर
जालोरजिले में विधानसभा चुनावों में पांच में से चार सीटें खोने के बाद गत विधानसभा चुनावों से भीनमाल विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग धड़ों में बटी कांग्रेस में डेमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया गया हैं। इसको लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गुरूवार को भीनमाल के पूर्व विधायक डॉ. समरजीतसिंह को जालोर जिलाध्यक्ष मनोनीत कर कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकने की कोशिश की हैं। इससे जहां समरजीतसिंह गुट में जोश का संचार हुआ हैं,वहीं बुधवार को डॉ. सिंह के विरोधी माने जाने वाले युवा कांग्रेस लोकसभा क्षेत्र अध्यक्ष ऊमसिंह राठौड़ को निलंबित कर उनकी जगह आमसिंह परिहार को कार्यकारी अध्यक्ष मनोनीत करने से कांग्रेस की राजनीति में एक बार फिर से उबाल गया है। माना जा रहा है कि ऊमसिंह राठौड़ आमसिंह परिहार दोनों भोमिया राजपूत होने से एक-दूसरे का सार्वजनिक विरोध तो नहीं कर रहे,मगर डॉक्टर सिंह को अध्यक्ष बनाने पर किसी किसी रुप में इसे माइनस एंगल से देखा जा रहा हैं। इधर ऊमसिंह के निलंबन के बाद पीसीसी ने पूर्व विधायक डॉ. समरजीतसिंह को जिलाध्यक्ष बनाकर आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भीनमाल विधानसभा क्षेत्र की कमान सौंपने के संकेत देकर किसी किसी तरह डॉक्टर सिंह के समर्थकों को पॉवरफुल बनाया है। जिससे ऊमसिंह राठौड़ गुट खासा नाराज नजर रहा है।
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उम्मीदवारीबदलने के साथ हार का आंकड़ा भी बदला
वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में भीनमाल विधानसभा क्षेत्र से विधायक पूराराम चौधरी ने पूर्व विधायक डॉ. समरजीतसिंह को 20 हजार से अधिक मतों से पराजित किया था। जिसपर 2013 के विधानसभा चुनावों में भीनमाल विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने समरजीतसिंह का टिकिट काटकर तत्कालीन युकां लोकसभा क्षेत्र अध्यक्ष ऊमसिंह राठौड़ को टिकट दिया था। मगर चुनावों में विधायक पूराराम चौधरी ने ऊमसिंह राठौड़ को पिछली हार से दोगुना चालीस हजार से अधिक मतों से पराजित कर उम्मीदवार बदलने का करारा झटका दिया था। चुनाव के बाद से ही भीनमाल विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस दो धड़ों में बट गई। हाल ही में संगठन के अलावा सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान दोनों गुटों की ओर से अपना-अपना शक्ति प्रदर्शन कांग्रेस में चर्चा का विषय रहा। हालांकि गत विधानसभा चुनावों से पूर्व विधायक डॉ. समरजीतसिंह शांत नजर आए, मगर राजनीतिक आकाओं से लगातार संपर्क और सांचौर के विधायक सुखराम विश्नोई रानीवाड़ा के पूर्व विधायक रतन देवासी सहित जिले के कांग्रेसी नेताओं के सहयोग से डॉ. समरजीतसिंह ने गुरूवार को तीसरी बार जालोर कांग्रेस कमेटी का जिलाध्यक्ष बनकर जिले की राजनीति में एकबार फिर से उबाल ला दिया है। हालांकि आने वाला समय ही बताएगा कि पीसीसी का यह निर्णय संगठन की मजबूती को लेकर कितना कारगर होता हैं।
^ पार्टी हाईकमान ने उम्मीदों के साथ जिम्मेदारी सौंपी है। जिले के सभी पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा। -डॉ.समजीतसिंह, जिलाध्यक्ष कांग्रेसी कमेटी जालोर
^संगठनके अनुभवी भीनमाल के पूर्व विधायक डॉ. समरजीतसिंह को जिलाध्यक्ष बनाकर पीसीसी ने कांग्रेस को मजबूती प्रदान करने का कार्य किया है। आने वाले दिनों में नवनियुक्त अध्यक्ष के नेतृत्व में गुटबाजी निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर जिले के विकास के लिए प्रयास करेंगे। -रतनदेवासी, पूर्व उप मुख्य सचेतक
दो बार विधायक दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके है सिंह
पूर्वमंत्री एवं भीनमाल से तीन बार विधायक रह चुके सूरजपालसिंह के पुत्र डॉ. समरजीतसिंह ने वर्ष 1995 में कांग्रेस के जिला परिषद सदस्य चुने थे। 1998 में भीनमाल से पहली बार 2003 में दुबारा विधायक चुने गए। वर्ष 2005 से 2010 तक लगातार दो बार निर्विरोध जिलाध्यक्ष भी रहे।
उमसिंह चांदराई
डा. समरजीतसिंह