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मोक्ष साध्य धर्म साधन है : जैनमुनि

7 वर्ष पहले
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महावीरस्वामी मंदिर में आयोजित सैंतालीस दिवसीय उपधान तप के तीसवें दिन गुरुवार को जैनमुनि जयर| विजय महाराज की सानिध्यता में प्रवचन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर जैनमुनि जयर| विजय मसा ने कहा कि मानव जीवन में साध्य पुरुषार्थ धर्म और मोक्ष ही है। मोक्ष साध्य है और धर्म साधन है। परंतु लोक में सभी आत्माएं अर्थ और काम का संपूर्ण त्याग कर एक मात्र मोक्ष पुरुषार्थ की साधना नहीं कर पाती है।

अनादिकालीन अर्थ-काम की पराधीनता तथा वैराग्यादि गुणों के अभाव के कारण आत्मा सर्वथा एक मात्र मोक्ष, पुरुषार्थ के लिए प्रय| नहीं कर पाती है। सद्गृहस्थ बनने के लिए उपर्युक्त तीनों पुरुषार्थ अनिवार्य है, क्योंकि इन तीनों में से एक की भी उपेक्षा करने से गृहस्थ का जीवन अस्त-व्यस्त होने की संभावना रहती है। अर्थात् सद् गृहस्थ समतौल रखकर तीनों पुरुषार्थ का सेवन करें। एक पुरुषार्थ की संपूर्ण उपेक्षा अथवा एक पुरुषार्थ को एक मात्र साध्य बनाएं उन्होंने मेघमुनि का दृष्टांत देते हुए बताया कि जिस प्रकार मेघमुनि ने पूर्व भव में एक खरगोश को अग्नि से बचाने के लिए अपना पैर ऊंचा उठाए रखा और अग्नि प्रकोप के शांत होने पर स्वयं पांव नीचे रखने से गिरकर मरण को प्राप्त हुए। दूसरे जन्म में राजपुत्र के रुप में जन्म धारण किया। जीवदया धर्म के प्रभाव से तीर्यंच गति से निकल कर मनुष्य भव प्राप्त किया। इस अवसर पर जैनमुनि आनंदविजय मसा सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद थे।

भीनमाल. स्थानीयमहावीर स्वामी मंदिर में प्रवचन देते जैनमुनि और उपस्थित जैन समाज के लोग।