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सांचौर क्षेत्र में रायड़ा, गेहंू जीरे की फसल की कम हुई बुवाई, ईसबगोल की बुवाई हुई ज्यादा

7 वर्ष पहले
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सर्दी में देरी से इस बार कम हुई फसलों की बुवाई

मौसम का असर

पिछलेदिनों से पड़ रही गर्मी के चलते बुवाई के बाद किसानों को फसल पकने की चिंता सता रही थी। मगर पिछले दो दिनों से चली शाीत लहर से किसानों की चिंता घटी है। जबकि क्षेत्र में मौसम की अनुकूलता के अभाव में गत साल की तुलना इस बार किसानों ने भी मौसम की अनुकूलता के अभाव में किसानों ने रायड़ा,जीरा गेहूं में गत साल की तुलना में 10 से 20 प्रतिशत कम बुवाई की हैं। हालांकि ईसबगोल की बुवाई गत साल की तुलना में 20 प्रतिशत की बढोतरी हुई है। वहीं नहरी क्षेत्र में टेल के किसानो को पर्याप्त पानी के अभाव में जीरे जैसी बुवाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलना भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

किस जीन्स की कितनी बुवाई

क्षेत्रमें सीयालू सीजन में सांचौर सहित पूरे क्षेत्र में विभाग के आंकड़ो के मुताबिक बुवाई पर बढोतरी को लेकर गिरावट दर्ज की गई है। जिसमें जीरा 14 हजार हैक्टेयर, ईसबगोल 7200 हैक्टयेर इसकी बुवाई अभी भी चल रही है जिसके ओर ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। वहीं रायड़ा 17 हजार हैक्टयेर में बुवाई हुई है, मगर बीज अंकुरित नहीं होने से 2हजार हैक्टयेर में खेती नष्ट हुई है। गेहंू की 1900 हैक्टयेर में ही बुवाई हुई है।

सांचौर क्षेत्र के खेत में अंकुरित हुई फसल।

कम बारिश भी रही मुख्य वजह

क्षेत्रमें सीयालू सीजन में मौसम की अनुकूलता के अभाव में कम बुवाई के पीछे बारिश कम होना भी मुख्य कारण है। कृषि अधिकारियों की माने तो कम बारिश से जहां रायड़ा, जीरा गेहूं की बुवाई प्रभावित होती है। सीयालू आधी सीजन जाने के बावजूद नवबर बीतने के बावजूद तापमान 25 डिग्री सेल्सियस चल रहा है। जबकि फसलो की बुवाई के दौरान तापमान 20 डिग्री तक चाहिए। अधिक तापमान के कारण जहां फसलें अंकुरित नहीं हो पाती है।

मौसमकी अनुकूलता से कम हुई बुवाई

^मौसमकी अनुकूलता के अभाव में बुवाई हैक्टेयर में गिरावट की मुख्य वजह रही है, वहीं ईसबागोल का बाजार में भाव में अच्छे होने से बुवाई बढ़ रही है। हालांकि अभी बुवाई जारी है जो मौसम अनुकूल होने पर बुवाई आंकड़ा बढने की संभावना है। -सुमेरसिंह,सहायककृषि अधिकारी भीनमाल