- Hindi News
- अधिग्रहण के बाद भी जमीन पर हाउसिंग बोर्ड का कब्जा नहीं
अधिग्रहण के बाद भी जमीन पर हाउसिंग बोर्ड का कब्जा नहीं
भिवाड़ी|करीब 22साल पहले आवास योजना के लिए हाउसिंग बोर्ड द्वारा अधिग्रहित की गई 29 बीघा जमीन अब तक किसानों से मुक्त नहीं हो सकी है। किसान मुआवजा राशि से संतुष्ट नहीं है। यही वजह है कि संबंधित किसानों ने बोर्ड से मुआवजा नहीं लिया और बोर्ड ने यह राशि कोर्ट में जमा करा दी। लेकिन विवाद का हल होने के चलते योजना पर काम शुरू नहीं हो सका है। मिलकपुर गांव में जमीन का अधिग्रहण वर्ष 1993 में किया गया था। प्रति बीघा करीब दो लाख रुपए तय किया गया था। किसान इससे सहमत नहीं थे। तब वर्ष 2004 2008 में बोर्ड ने मुआवजे का करीब 53 लाख रुपए कोर्ट में जमा करा दिया। कुछ मामलों में तो लोगों ने अवार्ड प्राप्त कर लिए हैं। जिन काश्तकारों ने अवार्ड की राशि नहीं ली, उनके लिए भी मंडल की ओर 15 से 25 प्रतिशत विकसित भूमि का भी विकल्प दिया गया है। लेकिन इसके भी सकारात्मक परिणाम नहीं आए। शहर में बढ़ती आबादी और आवास की समस्या को देखते हुए बड़ी संख्या में लोग आवासन मंडल की अफाेर्डेबल आवास योजना का इंतजार कर रहे हैं। वहीं कब्जा नहीं मिलने की वजह से आवासन मंडल अधिग्रहित भूमि पर किसी भी प्रकार की योजना नहीं ला पा रहा।
विकसितभूमि का प्रस्ताव भी बेअसर
आवासनमंडल द्वारा अधिग्रहित भूमि के बदले विकसित भूमि दिए जाने के लिए तय नियमों के अनुसार 2005 से पूर्व की अधिग्रहित जमीनों के लिए 15 प्रतिशत विकसित भूमि और इसके बाद की अधिग्रहित भूमि वाले काश्तकारों को 25 प्रतिशत विकसित भूमि देना तय हुआ था। लेकिन मिलकपुर गांव के काश्तकारों ने आवासन मंडल के प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया। ऐसे में करीब 29 बीघा जमीन काश्तकारों के कब्जे में ही है।
^आवासनमंडल की ओर से ऐसे काश्तकारों के मुआवजे की राशि काेर्ट में जमा करा दी जिनका मामला कोर्ट में लंबित था। इसके बाद भी इन लोगों ने अवार्ड राशि नहीं ली। वर्तमान में कोई मामला न्यायालय में विचाराधीन नहीं है। इस बारे में मुख्यालय को भी लिखा है तथा अधिग्रहित जमीन का कब्जा लेने के लिए प्रशासन से सहयोग मांगा जा रहा है। -केसी ढाका,आवासीय अभियंता,आवासन मंडल भिवाड़ी