जुबां चुप रहे तो कलम बोलती है
भिवाड़ी | अभिव्यक्तिसाहित्य कला एवं संस्कृति मंच की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने प्रेम और सौंदर्य के साथ गंगा-जमुनी तहजीब पर कविताएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि सम्मेलन में समसामयिक विषयों पर व्यंग्य करते हुए कविताएं पढ़ी गई। शहर के श्याम वाटिका में आयोजित कवि सम्मेलन में राय बरेली से आए कवि राजेंद्र निश्छल ने ‘जितना करीब तुम थे उतनी ही दूर हो’, ‘पनघट है सूना-सूना जबसे गए हो तुम’ कविता द्वारा श्रोताओं की ताली बटोरी। वहीं शायर शरफ बहराइची ने सांप्रदायिक हिंसा पर कटाक्ष करते हुए ‘कभी कत्ले मासूम छिपता नहीं, जुबां चुप रहे तो कलम बोलती है’, ‘मोहब्बत का कानों में रस घोलते हैं, ये उर्दू जबां है जो हम बोलते हैं’ से गंगा जमुनी संस्कृति का परिचय दिया। कवि राजेंद्र प्रसाद तिवारी ‘कंटक’ ने ‘बिन बोले जो होता वो ही प्यार है, विश्व की दृष्टि में श्रृष्टि साकार है’ शब्दों द्वारा प्यार का संदेश दिया। समसामयिक विषयों पर कविता पढ़ते हुए अलवर से आई कवयित्री रितु गुप्ता ने नई पीढ़ी को सकारात्मक सोच का संदेश देते हुए ‘आखें नम हो लेकिन मुस्कराता जा, खुद लेगी तुझे बाहों में मंजिल’ कविता पढ़ी। सम्मेलन मे डीवीएस राघव, रहमान भारतीय, रेणु अस्थाना ने भी काव्य पाठ किया। मंच संचालन शिव सागर शर्मा ‘भावुक’ ने किया। कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या मे श्रोता उपस्थित थे।
भिवाड़ी. कविता पाठ करते कवि शरफ बहराइची।
भिवाड़ी. श्याम वाटिका में आयोजित कवि सम्मेलन में मौजूद श्रोता।