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राजस्व पुलिस महकमा भ्रष्टाचार में आगे

7 वर्ष पहले
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तमामकोशिशों के बावजूद भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग पा रही है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो लगातार कार्रवाई कर रहा है। इस साल भी अब तक 17 अधिकारियों-कर्मचारियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, राजस्व विभाग पुलिस में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार के मामले पकड़े गए हैं। इसके बाद बिजली निगम चिकित्सा विभाग में भ्रष्टाचार सामने रहा है। एसीबी ने इस साल पद के दुरुपयोग के 9 और आय से अधिक संपत्ति के 4 मामले भी दर्ज किए हैं, लेकिन इन सबको सजा मिले, यह कहना मुश्किल है। कारण है एसीबी अपनी जांच पूरी कर मजबूत केस भी बना लेती है, लेकिन विभागाध्यक्षों सहित अाला अफसर अधिकांश मामलों में चालान पेश करने की अनुमति ही नहीं देते।

जिले में इस साल एसीबी ने 17 कर्मचारी अधिकारियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। इनमें 4 पटवारी एवं एक गिरदावर, 4 पुलिसकर्मी, 3 बिजली निगम के अधिकारी कर्मचारी तथा एक डॉक्टर शामिल है। एक डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एसीबी ने इस साल नौ अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ पद के दुरुपयोग के मामले दर्ज किए हैं। इनमें यूआईटी के तत्कालीन सचिव इंदरसिंह सोलंकी, तत्कालीन डीटीओ नवीन यादव, तत्कालीन तिजारा थाना प्रभारी मदनलाल जैफ जैसे अधिकारी भी हैं।

इधर, विभागीय अधिकारियों एवं विधि विशेषज्ञों का कहना है कि अलवर जिले के कई ऐसे मामले हैं, जो लंबे समय से अभियोजन की स्वीकृति के इंतजार में सरकार के लाल बस्तों में बंद हैं। अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिलने से आरोपी अधिकारी-कर्मचारी बहाल हो जाते हैं। इससे भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद रहते हैं।

एडवोकेट श्योराम सिंह के अनुसार, भ्रष्टाचार में पकड़े गए अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश करने में परेशानी आती है। चार्जशीट के लिए विभाग की अनुमति लेना जरूरी है। कई बार अनुमति नहीं मिलने से सारे सबूतों के बावजूद आरोपी को सजा नहीं हो पाती।

ट्रेप कार्रवाइयों के मामले छोड़ दें तो बाकी अधिकांश मामले सरकार की अनुमति के लिए अटके हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि रंगेहाथ पकड़े गए भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई में एसीबी को ज्यादा परेशान नहीं होती लेकिन आय से अधिक संपत्ति पद के दुरुपयोग के मामलों में कार्रवाई करने में ब्यूरो के अधिकारियों को पसीने जाते हैं। ऐसे मामलों में ही अभियोजन की स्वीकृति मिलने म